दिल्ली ब्लास्ट की साज़िश बेनकाब, जैश आतंकी उमर ने तारिक के नाम पर लिया था फर्जी सिम कार्ड

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दिल्ली ब्लास्ट की साज़िश बेनकाब: जैश आतंकी उमर ने तारिक के नाम पर लिया था फर्जी सिम कार्ड 

दिल्ली में हुए धमाके की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने बताया है कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकी उमर ने हमले की योजना बनाने के लिए तारिक के नाम पर एक फर्जी सिम कार्ड लिया था। इसी सिम कार्ड से हुई कॉल डिटेल्स ने पूरी साजिश का राज खोल दिया।


कैसे उजागर हुई साजिश

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और NIA की संयुक्त जांच में पता चला कि धमाके से कुछ दिन पहले उमर ने इस सिम का इस्तेमाल कर अपने साथियों से लगातार संपर्क किया था। सिम कार्ड की कॉल डिटेल्स (CDR) खंगालने पर यह सामने आया कि इसका असली यूज़र उमर था, जबकि सिम कार्ड पर दर्ज पहचान तारिक नाम के व्यक्ति की थी।

जांचकर्ताओं को शक है कि यह सिम दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक छोटी मोबाइल दुकान से फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए लिया गया था। इस सिम का इस्तेमाल सिर्फ कुछ दिनों के लिए किया गया और धमाके के तुरंत बाद बंद कर दिया गया।


कॉल डिटेल्स ने खोला बड़ा नेटवर्क

कॉल रिकॉर्ड्स से पता चला कि उमर ने धमाके से ठीक पहले पाकिस्तान के बालाकोट इलाके में स्थित एक संदिग्ध नंबर पर संपर्क किया था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यही कॉल “एक्शन सिग्नल” था, जिसके बाद ब्लास्ट अंजाम दिया गया।
इसके अलावा, इस नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य नंबर जम्मू-कश्मीर, पंजाब और दिल्ली में सक्रिय पाए गए हैं। एजेंसियां अब इन सभी संपर्कों की गहराई से जांच कर रही हैं।


हमले का मकसद

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि दिल्ली में हुआ यह धमाका आतंकियों की बड़ी साजिश का हिस्सा था। उनका इरादा राजधानी में भय और अस्थिरता फैलाने का था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ब्लास्ट “ट्रायल रन” भी हो सकता है ताकि सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया समय और सतर्कता की परख की जा सके।


सरकारी रुख और कार्रवाई

गृह मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर गंभीरता दिखाई है और दिल्ली पुलिस तथा NIA को कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि इस नेटवर्क के हर सदस्य को बेनकाब किया जाएगा और भारत में आतंक फैलाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

साथ ही, दूरसंचार विभाग को भी निर्देश दिया गया है कि फर्जी आईडी से लिए जा रहे सिम कार्ड पर निगरानी को और मज़बूत किया जाए।

दिल्ली ब्लास्ट केस में हुआ यह खुलासा बताता है कि आतंकवादी संगठन अब तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं — फर्जी सिम, डिजिटल संचार और वर्चुअल नेटवर्क के ज़रिए।
लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की तेज़ कार्रवाई और तकनीकी दक्षता ने एक बार फिर साबित किया है कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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