प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात कर दी जन्मदिन की शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से भेंट कर उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। यह मुलाकात न केवल एक औपचारिक अभिवादन थी, बल्कि भारतीय राजनीति के दो युगों का भावनात्मक संगम भी थी — एक ओर जहां आडवाणी ने भाजपा की नींव को मजबूत किया, वहीं दूसरी ओर मोदी ने उसी नींव पर पार्टी को विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने आडवाणी के निवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि “लालकृष्ण आडवाणी जी हमारे देश के सबसे सम्माननीय और प्रेरणादायी नेताओं में से एक हैं। उन्होंने अपने आदर्शों, समर्पण और राष्ट्रसेवा से भारतीय राजनीति में अमिट छाप छोड़ी है। मैं उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं और उनके उत्तम स्वास्थ्य तथा दीर्घायु की कामना करता हूं।”
लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति का वह नाम हैं जिन्होंने जनसंघ से लेकर भाजपा तक के सफर को अपने समर्पण, संगठन कौशल और वैचारिक स्पष्टता से दिशा दी। वे भारतीय राजनीति में न केवल एक विचारक रहे हैं, बल्कि उन्होंने संगठन के माध्यम से राष्ट्रवाद को जन-जन तक पहुंचाया। उनके नेतृत्व में भाजपा ने 1980 और 1990 के दशक में जिस तेजी से जनाधार बढ़ाया, उसने देश की राजनीति का स्वरूप ही बदल दिया।
प्रधानमंत्री मोदी और आडवाणी के रिश्ते राजनीतिक गुरु और शिष्य जैसे हैं। मोदी ने कई मौकों पर यह स्वीकार किया है कि उन्होंने संगठन, अनुशासन और जनसंपर्क की कला आडवाणी जी से सीखी। जब 2014 में नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तब भी उन्होंने आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे वरिष्ठ नेताओं को अपना पथप्रदर्शक बताया था।
आडवाणी जी का जीवन सादगी, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा है। उनका जन्म कराची (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था, और विभाजन के बाद वे भारत आए। अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से की, और फिर भारतीय जनसंघ में सक्रिय भूमिका निभाई। आपातकाल के दौरान उनकी प्रतिबद्धता और संघर्ष ने उन्हें देश के शीर्ष नेताओं की पंक्ति में खड़ा किया।
आज जब भाजपा सत्ता में है और राष्ट्र के निर्माण की दिशा में अग्रसर है, तब आडवाणी जी के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। उनके सिद्धांतों और दृष्टिकोण ने भाजपा को न केवल संगठन के रूप में, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन के रूप में भी स्थापित किया।
प्रधानमंत्री मोदी की यह मुलाकात केवल एक बधाई का अवसर नहीं थी, बल्कि यह उस परंपरा का सम्मान भी था जिसमें वरिष्ठों का मार्गदर्शन और उनका आशीर्वाद राष्ट्रसेवा के पथ पर चलने वालों के लिए प्रेरणा बनता है। आडवाणी जी की सरलता, उनके विचार और उनके द्वारा छोड़ी गई राजनीतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।

