भाद्रपद की अष्टमी पर आएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, जानें 2025 में जन्माष्टमी की सही तारीख

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भाद्रपद की अष्टमी पर आएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, जानें 2025 में जन्माष्टमी की सही तारीख

हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी एक प्रमुख और अत्यंत पावन पर्व माना जाता है। यह पर्व भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, जब द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। 2025 में यह पर्व और भी खास होगा, क्योंकि इस वर्ष श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

2025 में जन्माष्टमी कब है?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि वर्ष 2025 में 18 अगस्त, सोमवार को पड़ रही है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र भी विद्यमान रहेगा, जिससे यह दिन श्रीकृष्ण जन्म के लिए अत्यंत शुभ और पूर्ण माना जा रहा है।

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 17 अगस्त 2025 को रात 09:21 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 18 अगस्त 2025 को रात 11:47 बजे तक
रोहिणी नक्षत्र काल: 18 अगस्त को शाम 06:10 बजे से आरंभ

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मध्य रात्रि का समय ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय माना जाता है, अतः इस दिन रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म की पूजा की जाती है।


जन्माष्टमी का महत्व

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए हुआ था। उन्होंने गीता का उपदेश देकर जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन और कर्म के महत्व को बताया। जन्माष्टमी पर व्रत, भजन-कीर्तन, झांकियों, दही-हांडी और रात्रि में विशेष पूजन का आयोजन किया जाता है।

लोग व्रत रखते हैं और रातभर “जय कन्हैया लाल की” के जयघोष के साथ भगवान के बालरूप की आराधना करते हैं। मटकी फोड़ प्रतियोगिता और रासलीला जैसे आयोजन इस पर्व को और भी आकर्षक बनाते हैं।

कैसे करें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजा?

  1. दिन भर व्रत रखें और सात्विक आहार लें (अगर नियम अनुसार फलाहार कर रहे हों)

  2. संध्या के समय घर में श्रीकृष्ण की झांकी सजाएं

  3. रात 12 बजे भगवान का जन्म होने पर उन्हें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं

  4. फूल, तुलसी पत्र, मक्खन और मिश्री अर्पित करें

  5. जन्म के बाद आरती करें और प्रसाद वितरण करें


निष्कर्ष

2025 की जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक चेतना का उत्सव है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि हर युग में अधर्म के विनाश और धर्म की रक्षा के लिए भगवान स्वयं अवतरित होते हैं। इसलिए इस दिन को श्रद्धा, भक्ति और आत्मचिंतन के साथ मनाना न केवल हमारी परंपरा है, बल्कि आत्मिक शांति की ओर एक कदम भी है।

इस वर्ष, 18 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्म का स्वागत कीजिए, और अपने जीवन में प्रेम, करुणा और धर्म के मार्ग को अपनाइए।


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