मोदी ने AI-171 हादसे के इकलौते बचे यात्री से की मुलाकात, 241 लोगों की दर्दनाक मौत
देश को झकझोर देने वाले AI-171 विमान हादसे ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है। यह विमान, जो मुंबई से दिल्ली की ओर उड़ान भर रहा था, कल दोपहर तकनीकी खराबी के चलते दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में कुल 242 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें से 241 लोगों की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह देश के विमानन इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बन गया है।
इस हादसे में एकमात्र जीवित बचे यात्री, 28 वर्षीय आरव मेहता, इस समय राजधानी दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। चिकित्सकों के अनुसार, उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन उन्हें गहरी मानसिक और शारीरिक चोटें आई हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर आरव मेहता से मिलने अस्पताल पहुंचे। प्रधानमंत्री ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उन्हें ढांढस बंधाया। मोदी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह एक असाधारण चमत्कार है कि इतने बड़े हादसे में आरव जीवित बचे हैं। हम उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करते हैं। पूरा देश उनके साथ है।”
प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति भी गहरी संवेदना प्रकट की और कहा कि केंद्र सरकार प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद करेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी, साथ ही घायलों के इलाज का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी।
AI-171 विमान दुर्घटना की जांच के लिए नागरिक विमानन मंत्रालय ने उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, विमान के इंजन में तकनीकी खराबी के कारण यह हादसा हुआ। विमान के ब्लैक बॉक्स को जांच के लिए भेजा गया है और विशेषज्ञ टीम डेटा का विश्लेषण कर रही है।
इस त्रासदी के बाद देश भर में शोक की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर लोग अपने-अपने तरीके से श्रद्धांजलि दे रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य प्रमुख नेताओं ने भी इस हादसे पर शोक व्यक्त किया है।
आरव मेहता की जीवित बचने की कहानी भी लोगों में आशा और जिजीविषा का संदेश दे रही है। उन्होंने अस्पताल में अपने बयान में कहा, “मैंने सोचा था कि अब जीवन समाप्त हो जाएगा, लेकिन किसी चमत्कार से मैं बच गया। अब मेरा जीवन सिर्फ मेरा नहीं, उन 241 आत्माओं की स्मृति है।”
AI-171 हादसे ने देश को एक गहरी चोट दी है, जिसे भरने में वक्त लगेगा। लेकिन इस त्रासदी ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि जीवन कितना अनमोल है और तकनीकी सुरक्षा को प्राथमिकता देना कितना आवश्यक है।

