स्वाति मालीवाल का आतिशी पर प्रहार: AAP की हार के बीच जश्न मनाने पर उठाए सवाल, बेशर्मी करार दिया

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स्वाति मालीवाल ने आतिशी पर हमला किया: AAP की हार के बीच जश्न मनाने पर सवाल उठाए, इसे बेशर्मी बताया

हाल ही में दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद दिल्ली में राजनीतिक माहौल उथल-पुथल भरा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) को कई अहम सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, वहीं पार्टी के भीतर ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। AAP नेता स्वाति मालीवाल ने पार्टी की हार के बावजूद जश्न मनाने के लिए आतिशी मार्लेना की खुलकर आलोचना की है।

स्वाति मालीवाल की तीखी आलोचना

AAP की प्रमुख नेता और दिल्ली महिला आयोग (DCW) की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आतिशी का जश्न मनाते हुए एक वीडियो शेयर किया और इस तरह की हरकत के पीछे की असंवेदनशीलता पर सवाल उठाया। अपनी पोस्ट में मालीवाल ने टिप्पणी की, **”यह कैसी बेशर्मी है? पार्टी हार गई, बड़े नेता हार गए, फिर भी आतिशी इस तरह जश्न मना रही हैं?”**

उनकी प्रतिक्रिया ने इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या आतिशी का इस बात पर खुश होना उचित था कि आप को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।

आप की हार का संदर्भ

चुनाव के नतीजे आप के लिए निराशाजनक रहे, जिसने पहले दिल्ली की राजनीति में अपनी पकड़ बनाई हुई थी। दिग्गज उम्मीदवारों सहित कई प्रमुख नेताओं को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। इस नतीजे ने पार्टी की रणनीति, नेतृत्व और भविष्य की कार्रवाई के बारे में आंतरिक चर्चाओं को जन्म दिया है।

आप की वरिष्ठ नेता आतिशी अपने निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल करने में सफल रहीं। उनका जश्न, जो संभवतः उनकी जीत की व्यक्तिगत स्वीकृति थी, मालीवाल ने पार्टी की समग्र हार के प्रति असंवेदनशीलता के संकेत के रूप में देखा।

पार्टी के भीतर प्रतिक्रियाएँ और जनता की प्रतिक्रिया

मालीवाल की टिप्पणियों से AAP के भीतर और उसके समर्थकों में विभाजित प्रतिक्रिया हुई है। कुछ लोगों का मानना ​​है कि आतिशी को अपनी व्यक्तिगत जीत का जश्न मनाने का पूरा अधिकार था, क्योंकि कठिन चुनाव में सीट जीतना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालाँकि, अन्य लोग मालीवाल से सहमत हैं, उनका तर्क है कि पार्टी की समग्र हार को देखते हुए अधिक गंभीर और चिंतनशील दृष्टिकोण उचित होता।

राजनीतिक विश्लेषकों ने बताया है कि राजनीति में जनता की धारणा मायने रखती है। ऐसे समय में जब AAP संकट का सामना कर रही है, जश्न मनाने का कोई भी कार्य समर्थकों और कार्यकर्ताओं को गलत संदेश दे सकता है जो परिणामों से निराश हैं।

मुद्दे पर आतिशी का रुख

आतिशी ने मालीवाल की टिप्पणियों पर सीधे तौर पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों का सुझाव है कि वह अपने जश्न को AAP की हार को खारिज करने के बजाय अपने मतदाताओं के प्रति आभार के क्षण के रूप में देखती हैं। AAP के कुछ नेता उनके बचाव में आए हैं, उन्होंने कहा कि इस समय आंतरिक मतभेदों पर ध्यान केंद्रित करने से पार्टी को मदद करने के बजाय नुकसान हो सकता है।

बड़ी तस्वीर: AAP का भविष्य

इस विवाद से परे, बड़ा सवाल यह है: AAP के लिए आगे क्या? पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति का आकलन करना होगा, अपने मतदाता आधार से फिर से जुड़ना होगा और संभवतः अपने गढ़ को फिर से हासिल करने के लिए नेतृत्व की भूमिकाओं का पुनर्गठन करना होगा। मालीवाल और आतिशी के बीच टकराव में देखी गई आंतरिक दरार अतिरिक्त चुनौतियाँ खड़ी कर सकती है।

जैसे-जैसे AAP इस कठिन दौर से गुज़र रही है, पार्टी की एकता और रणनीतिक पुनर्संतुलन इसके राजनीतिक अस्तित्व और भविष्य की सफलता को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा। यह घटना आगे बढ़ती है या आंतरिक रूप से हल हो जाती है, यह देखना बाकी है।


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