प्रशांत किशोर का वार: शराबबंदी पर तेजस्वी यादव की चुनावी नौटंकी का किया पर्दाफाश, बताया दिखावा और भ्रमजाल
राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है। इस बार उनके निशाने पर हैं राज्य के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव। मुद्दा है बिहार में लागू शराबबंदी कानून, जिसे लेकर प्रशांत किशोर ने तेजस्वी पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “चुनावी नौटंकी” और “जनता को गुमराह करने का साधन” बताया है।
प्रशांत किशोर, जो इन दिनों बिहार को लेकर जन सुराज यात्रा चला रहे हैं, ने कहा कि शराबबंदी की नीतियों को लेकर सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव, जो चुनावी मंचों से शराबबंदी की सख्ती की बात करते हैं, वास्तव में इस मुद्दे पर गंभीर नहीं हैं। किशोर का कहना है कि शराबबंदी केवल एक राजनीतिक स्टंट बन कर रह गई है, जिसका ज़मीनी असर नगण्य है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बिहार के गांव-गांव में शराब अब भी आसानी से उपलब्ध है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार की मिलीभगत से अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है। किशोर के अनुसार, यह सब “दिखावा” है, ताकि जनता को यह विश्वास दिलाया जा सके कि सरकार नैतिक मूल्यों के साथ काम कर रही है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव पर व्यक्तिगत हमला करते हुए कहा कि जब विपक्ष में रहते हुए तेजस्वी शराबबंदी पर सवाल उठाते थे, तब उन्होंने सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। लेकिन सत्ता में आते ही उन्होंने उसी नीति का समर्थन करना शुरू कर दिया। यह दोहरा रवैया केवल वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है, न कि किसी वास्तविक सामाजिक सुधार की प्रतिबद्धता।
वहीं तेजस्वी यादव खेमे से अभी तक इस पर कोई सीधा जवाब नहीं आया है, लेकिन राजद समर्थक नेताओं का कहना है कि प्रशांत किशोर अब खुद को राजनीति में स्थापित करने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकते हैं और उनके आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर के इस बयान का असर निश्चित तौर पर बिहार की राजनीति पर पड़ेगा, खासकर आगामी चुनावों में। शराबबंदी बिहार की जनता के लिए एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, और अगर सरकार की नीयत पर सवाल उठते हैं, तो यह सत्ताधारी गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकता है।
कुल मिलाकर, प्रशांत किशोर ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वे न सिर्फ रणनीतिकार हैं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर मुखर आवाज़ उठाने से पीछे नहीं हटते। शराबबंदी पर तेजस्वी यादव की कथित “नौटंकी” को उजागर कर उन्होंने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है।
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