बिहार बदलाव यात्रा में प्रशांत किशोर पहुँचे महेन्द्रनाथ मंदिर, मेंहदार से दरौंधा तक आशीर्वाद संग आगे बढ़ी जनसुराज रैली

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बिहार बदलाव यात्रा में प्रशांत किशोर पहुँचे महेन्द्रनाथ मंदिर, मेंहदार से दरौंधा तक आशीर्वाद संग आगे बढ़ी जनसुराज रैली

बिहार की सियासत में एक नई ऊर्जा और नई सोच लेकर निकली जनसुराज यात्रा अब बदलाव की एक सशक्त पहचान बन चुकी है। इसी क्रम में प्रशांत किशोर अपनी यात्रा के दौरान सिवान जिले के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पहुँचे, जहाँ उन्होंने महेन्द्रनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और फिर मेंहदार, रामगढ़, सिसवन होते हुए दरौंधा तक की यात्रा पूरी की।

प्रशांत किशोर, जिन्हें जनता अब एक रणनीतिकार से बढ़कर एक जननायक के रूप में देखने लगी है, लगातार बिहार के गांवों और कस्बों का दौरा कर रहे हैं। वे न केवल लोगों की समस्याओं को सुन रहे हैं, बल्कि हर कदम पर यह विश्वास जता रहे हैं कि बिहार की तकदीर तभी बदलेगी जब आम जनता खुद नेतृत्व की ज़िम्मेदारी उठाएगी।

महेन्द्रनाथ मंदिर में की पूजा, मांगा जनकल्याण का आशीर्वाद

जनसुराज यात्रा के तहत सिवान जिले के दरौंधा प्रखंड के महेन्द्रनाथ मंदिर पहुँचकर प्रशांत किशोर ने विधिवत पूजा-अर्चना की। यह मंदिर क्षेत्र की आस्था का केंद्र है और हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। पूजा के बाद मीडिया से बात करते हुए पीके ने कहा, “बिहार की मिट्टी पवित्र है, इसकी आस्था, परंपरा और संस्कृति ही इसकी असली ताकत है। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि बिहार को एक नई दिशा और नई सोच मिले।”

जनसंपर्क के दौरान मिला अपार समर्थन

मेंहदार से दरौंधा तक की यात्रा में प्रशांत किशोर का जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। गाँवों में महिलाएं थाल सजाकर स्वागत के लिए खड़ी दिखीं, युवाओं ने पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ नारे लगाए और बुजुर्गों ने आशीर्वाद दिया। यह नज़ारा इस बात का प्रमाण था कि जनसुराज यात्रा अब सिर्फ एक राजनीतिक अभियान नहीं, बल्कि लोगों के दिलों की आवाज बन चुकी है।

मुद्दों पर खुलकर संवाद

प्रशांत किशोर ने अपनी यात्रा के दौरान ग्रामीणों के साथ बैठकें कर उनके मुद्दों को सुना। शिक्षा की बदहाली, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, बेरोज़गारी, किसानों की समस्याएं और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर उन्होंने लोगों से सीधी बातचीत की। उन्होंने कहा कि बिहार में सत्ता बदलने से कुछ नहीं होगा, सोच और व्यवस्था को बदलना होगा।

उनकी इस यात्रा का उद्देश्य है — “राजनीति को जनता के बीच से निकालना, न कि जनता को राजनीति के पीछे खींचना।” यही वजह है कि वह किसी पार्टी के झंडे तले नहीं, बल्कि जनता के झंडे के साथ चल रहे हैं।

निष्कर्ष

प्रशांत किशोर की जनसुराज यात्रा अब बिहार में एक जनांदोलन का रूप लेती जा रही है। महेन्द्रनाथ मंदिर से मिली आस्था, मेंहदार से दरौंधा तक मिला जनसमर्थन इस बात का संकेत है कि बिहार बदलाव के लिए तैयार है। यह यात्रा न केवल राजनीति की दिशा बदलने की कोशिश है, बल्कि जनता को उसका असली हक दिलाने का एक गंभीर प्रयास भी है।


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