खान सर का 16 करोड़ की मशीन वाला हॉस्पिटल, लेकिन इलाज सिर्फ ₹40-₹50 में, सस्ती सेवा की मिसाल बनेगा
देशभर में शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके पटना के खान सर अब स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी एक ऐतिहासिक पहल करने जा रहे हैं। उनका आगामी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल न सिर्फ आधुनिक तकनीक से लैस होगा, बल्कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए उम्मीद की एक नई किरण साबित होगा। इस हॉस्पिटल की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां इलाज के लिए महंगी विदेशी मशीनें मौजूद होंगी, जिनकी कुल कीमत करीब ₹16 करोड़ होगी — फिर भी मरीजों से सिर्फ ₹40 से ₹50 की मामूली फीस ली जाएगी।
इस पहल के पीछे खान सर की वही सोच है जो उन्हें लाखों छात्रों के बीच प्रिय बनाती है — “सेवा पहले, मुनाफा बाद में”। उन्होंने पहले शिक्षा को सुलभ और सस्ता बनाया, और अब स्वास्थ्य सेवाओं को आम आदमी की पहुंच में लाने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है।
हॉस्पिटल में जिन अत्याधुनिक मशीनों को लगाया जाएगा, उनमें कई ऐसी हैं जो आज भी भारत के सामान्य सरकारी अस्पतालों में नहीं पाई जातीं। MRI, CT स्कैन, डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, डायलिसिस यूनिट्स, और ICU वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं इस हॉस्पिटल का हिस्सा होंगी। खास बात यह है कि इन सभी तकनीकों के संचालन के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर और प्रशिक्षित तकनीशियन नियुक्त किए जाएंगे, ताकि मरीजों को सर्वोत्तम इलाज मिल सके।
खान सर का मानना है कि गरीब का इलाज करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, समाज के लोगों को भी इसमें योगदान देना चाहिए। वे कहते हैं, “अगर एक बच्चा ₹200 की कोचिंग लेकर UPSC पास कर सकता है, तो वही सोच हम इलाज में क्यों नहीं अपना सकते?”
इस हॉस्पिटल का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है और उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में यह पूरी तरह से शुरू हो जाएगा। यहां इलाज पूरी पारदर्शिता और सरल प्रक्रिया के साथ होगा। कोई दलाल, कोई VIP कल्चर नहीं — सिर्फ सेवा और समर्पण। इसके साथ-साथ खान सर यह भी सुनिश्चित करेंगे कि अस्पताल में इलाज के दौरान किसी मरीज को अपमान या भेदभाव का सामना न करना पड़े।
इतना ही नहीं, खान सर की टीम ग्रामीण इलाकों में मेडिकल कैंप भी आयोजित करेगी, ताकि दूरदराज के मरीजों को भी मुफ्त सलाह और दवाइयां मिल सकें। भविष्य में वह मोबाइल मेडिकल वैन सेवा शुरू करने की योजना भी बना रहे हैं।
खान सर का यह कदम दिखाता है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो सीमित संसाधनों में भी असंभव को संभव बनाया जा सकता है। यह हॉस्पिटल न सिर्फ इलाज का केंद्र बनेगा, बल्कि सामाजिक बदलाव की प्रेरणा का भी स्रोत होगा।

