लगातार बारिश से यमुना उफान पर, लोहा पुल से ड्रोन दृश्य में दिखा नदी का खौफनाक और खतरनाक रूप
दिल्ली-एनसीआर में लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस भारी बारिश का सबसे बड़ा असर यमुना नदी पर देखा जा रहा है, जो खतरे के निशान को पार कर चुकी है। बीते कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश और पहाड़ों से आ रहे पानी के कारण यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। अब स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि नदी अपने किनारों को लांघकर रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ने लगी है।
ड्रोन कैमरे से लोहा पुल के ऊपर से लिए गए ताज़ा दृश्य में यमुना नदी की विकरालता साफ नजर आ रही है। नदी का पानी पुल की गर्डरों के बेहद करीब पहुंच गया है। सामान्य दिनों में जहां दूर तक सूखी ज़मीन नजर आती थी, अब वहां सिर्फ पानी ही पानी फैला हुआ है। इस दृश्य ने प्रशासन और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
लोहा पुल के पास बसे निचले इलाकों में लोगों ने अपने घरों से सामान समेटना शुरू कर दिया है। कई स्थानों पर बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। प्रशासन ने एहतियातन कुछ क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया है और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। राहत और बचाव दल भी तैनात किए जा चुके हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
पानी के तेज बहाव ने आसपास की खेती-बाड़ी को भी नुकसान पहुंचाया है। खेत जलमग्न हो चुके हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, जलभराव के कारण सड़क परिवहन भी बाधित हो रहा है। कई मार्गों पर यातायात रोकना पड़ा है और ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है।
मौसम विभाग की मानें तो फिलहाल बारिश से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है। अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे यमुना का जलस्तर और भी बढ़ सकता है। ऐसे में खतरे की आशंका और बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पिछले कई वर्षों में यमुना को इतना उफनते हुए नहीं देखा। बुजुर्गों का मानना है कि यह स्थिति 1978 की भयावह बाढ़ की याद दिला रही है, जब यमुना का पानी शहर के कई हिस्सों में घुस गया था।
प्रशासन की ओर से जल स्तर की लगातार निगरानी की जा रही है, और आपदा प्रबंधन विभाग भी पूरी तरह सतर्क है। हालांकि, लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि वे अफवाहों से दूर रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
इस समय ज़रूरत है सतर्कता, सहयोग और सजगता की, ताकि इस प्राकृतिक आपदा से जान-माल का नुकसान कम से कम हो सके। यमुना का यह खतरनाक रूप एक चेतावनी है कि प्रकृति से छेड़छाड़ का अंजाम कितना भयावह हो सकता है।

