भोजपुरी के ‘पावर स्टार’ पवन सिंह का जन्मदिन: 11 साल की उम्र से शिखर तक का सफर
वाराणसी/आरा, 5 जनवरी 2026 – भोजपुरी सिनेमा के निर्विवाद ‘पावर स्टार’ पवन सिंह आज अपना 40वां जन्मदिन मना रहे हैं। बिहार के आरा जिले के एक छोटे से गांव जोकहरी से निकलकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले पवन सिंह की कहानी संघर्ष, लगन और कभी न हार मानने वाले जज्बे की मिसाल है। आज उनके जन्मदिन पर सोशल मीडिया से लेकर बिहार की सड़कों तक जश्न का माहौल है।
11 साल की उम्र और पहली एल्बम ‘ओढ़निया वाली’
पवन सिंह का संगीत से नाता बचपन से ही जुड़ गया था। मात्र 11 साल की उम्र में, साल 1997 में उन्होंने अपनी पहली एल्बम ‘ओढ़निया वाली’ रिकॉर्ड की थी। दिलचस्प बात यह है कि उस समय उन्हें यह भी नहीं पता था कि उनकी आवाज कैसेट्स के जरिए घर-घर पहुंच रही है। उनके चाचा अजीत सिंह, जो उनके गुरु भी हैं, ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें तराशा। हालांकि, शुरुआती दौर आसान नहीं था; उन्हें शो पाने और अपनी पहचान बनाने के लिए कई सालों तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा।
‘लॉलीपॉप लागेलू’ और वैश्विक प्रसिद्धि
पवन सिंह के करियर में सबसे बड़ा मोड़ साल 2008 में आया, जब उनका गाना “लॉलीपॉप लागेलू” रिलीज हुआ। इस गाने ने न केवल भोजपुरी जगत बल्कि पूरी दुनिया में धूम मचा दी। आज भी यह गाना विदेशी क्लबों और अंतरराष्ट्रीय पार्टियों की शान बना हुआ है। इसी गाने ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया और उन्हें ‘पावर स्टार’ का खिताब मिला।
संघर्ष और विवादों के बीच सफलता
सफलता के साथ-साथ पवन सिंह का जीवन विवादों और व्यक्तिगत उतार-चढ़ाव से भी घिरा रहा। अपनी पहली पत्नी के निधन और व्यक्तिगत संबंधों को लेकर वह अक्सर चर्चा में रहे, लेकिन उन्होंने कभी अपनी कला को प्रभावित नहीं होने दिया। उन्होंने ‘प्रतिज्ञा’, ‘सत्या’, ‘क्रैक फाइटर’ और ‘राजा’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। आज वह एक फिल्म के लिए लगभग 40 से 50 लाख रुपये चार्ज करते हैं और भोजपुरी के सबसे महंगे कलाकारों में शुमार हैं।
2026: एक नया मोड़?
इस साल पवन सिंह का जन्मदिन विशेष है क्योंकि चर्चाएं हैं कि वह जल्द ही राजनीति के मैदान में एक नई और बड़ी भूमिका में नजर आ सकते हैं। हाल ही में उनके नए गानों ने यूट्यूब पर करोड़ों व्यूज बटोरकर यह साबित कर दिया है कि आज भी भोजपुरी इंडस्ट्री में उनका ‘पावर’ बरकरार है। प्रशंसकों के बीच आज उनके नए गाने “बनी लइका” और “3 थान” जैसे गानों की धूम मची हुई है।
पवन सिंह की यह यात्रा सिखाती है कि यदि प्रतिभा के साथ धैर्य हो, तो आरा की गलियों से निकलकर दुनिया के मंच तक पहुंचना असंभव नहीं है।

