17 जनवरी को केसरिया में स्थापित होगा विश्व का सबसे बड़ा सहस्त्रलिंगम; ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क।
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया (कैथवलिया) में अध्यात्म और आधुनिक इंजीनियरिंग का एक अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में आगामी 17 जनवरी 2026 को दुनिया के सबसे बड़े ‘सहस्त्रलिंगम’ शिवलिंग की स्थापना होने जा रही है। इस ऐतिहासिक घड़ी को लेकर न केवल चंपारण बल्कि पूरे देश के शिवभक्तों में जबरदस्त उत्साह है।
210 टन का महाकाय ‘सहस्त्रलिंगम’
तमिलनाडु के महाबलीपुरम से करीब 2,500 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर पहुंचा यह शिवलिंग अपने आप में अनोखा है।
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विशालता: इस शिवलिंग की ऊंचाई 33 फीट और गोलाई भी 33 फीट है। इसका कुल वजन 210 मीट्रिक टन (2.10 लाख किलो) है।
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विशेषता: इसे ‘सहस्त्रलिंगम’ कहा जाता है क्योंकि एक ही मुख्य शिवलिंग की सतह पर 108 छोटे-छोटे शिवलिंग नक्काशी के जरिए उकेरे गए हैं। यह एक ही अखंड काले ग्रेनाइट पत्थर (Black Granite) से तराशा गया है, जिसे बनाने में शिल्पकारों को लगभग 10 साल का समय लगा।
17 जनवरी का विशेष मुहूर्त और अनुष्ठान
महावीर मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, स्थापना के लिए माघ कृष्ण चतुर्दशी (नरक निवारण चतुर्दशी) का दिन चुना गया है। शास्त्रों के अनुसार इसी तिथि को भगवान शिव पहली बार शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे।
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पवित्र जलाभिषेक: स्थापना के समय कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज और सोनपुर जैसे पांच पवित्र स्थानों से लाए गए जल से अभिषेक किया जाएगा।
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पुष्प वर्षा: आयोजन को भव्य बनाने के लिए प्रशासन और ट्रस्ट ने हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की योजना बनाई है।
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क्रेन की मदद: शिवलिंग को उसके मुख्य स्थान पर रखने के लिए भोपाल से विशेष रूप से 750 टन क्षमता वाली विशाल क्रेन मंगवाई गई है।
प्रशासनिक तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ‘अलर्ट मोड’ पर है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने स्वयं मंदिर परिसर का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया है।
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भीड़ नियंत्रण: मुख्य सड़क (चकिया-केसरिया मार्ग) पर ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया गया है ताकि वाहनों का दबाव कम रहे।
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सीसीटीवी और पुलिस बल: पूरे मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। चप्पे-चप्पे पर अतिरिक्त पुलिस बल और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
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सुविधाएं: दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए पेयजल, मोबाइल टॉयलेट्स और प्राथमिक चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था की गई है।
विराट रामायण मंदिर: एक झलक
यह मंदिर कंबोडिया के ‘अंगकोर वाट’ से भी ऊंचा और बड़ा होगा। 120 एकड़ में फैले इस मंदिर परिसर में 22 अन्य मंदिर और 18 शिखर होंगे, जिनमें मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी। आचार्य किशोर कुणाल के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के 2030 तक पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है, लेकिन शिवलिंग की स्थापना के साथ ही यह स्थान विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी चमक बिखेरने लगा है।

