ब्याज दर नहीं बढ़ाने के RBI के फैसले के पीछे की असली वजह , महंगाई पर कंट्रोल से ज्यादा विकास को तरजीह क्यों?

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नई दिल्ली : ये दोधारी तलवार की तरह है। अर्थव्यस्था को संभालने में सबसे बड़ी दुविधा समझी जाती है। इससे विकास पर बुरा असर होता है। कारोबार ठप हो सकते हैं, नौकरियों में छंटनी का दौर शुरू हो सकता है। सवाल ये उठता है कि रिजर्व बैंक के लिए महंगाई पर काबू पाना जरूरी है या विकास को बढ़ावा देना। जब महंगाई तेजी से भागती है तो इस पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ाने लगता है। इस बारे में रिजर्व बैंक की नीति तय करने वाली कमिटी की ताजा बैठक हुई तो उसने साफ तौर पर विकास को चुना है, लेकिन क्यों?
महंगाई को कंट्रोल में रखना और विकास को बढ़ावा देना दोनों अलग-अलग मुद्दे हैं जो एक दूसरे से अलग होते हैं। महंगाई को कम करने के लिए एक सरकार को उचित नीतियों और उपायों का अनुसरण करना होता है, जो शायद दुर्लभ होते हैं। सरकार को महंगाई को कम करने के लिए विभिन्न उपायों का उपयोग करना होता है जैसे कि वित्तीय नीतियों का उपयोग, मूल्य नियंत्रण, कम टैक्स, और कम शुल्क।

दूसरी ओर, रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव लागू करने के पीछे की असली वजह कुछ अलग हो सकती है। रिजर्व बैंक के पास कई अन्य मुद्दे होते हैं जैसे कि मुद्रा के मूल्य में उतार-चढ़ाव, आर्थिक गतिशीलता, बैंकों के कारोबार पर असर, आदि। रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कोई बदलाव लागू करता है तो यह विभिन्न क्षेत्रों के अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालता है।

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