पद्म पुरस्कार 2025 में शारदा सिन्हा को पद्म विभूषण, बिहार के लिए गर्व और लोक संगीत की ऐतिहासिक उपलब्धि

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पद्म पुरस्कार 2025: दिवंगत शारदा सिन्हा को पद्म विभूषण, बिहार और लोक संगीत के लिए ऐतिहासिक गौरव

शनिवार की रात केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कार 2025 की सूची जारी की, जिसमें देशभर के कई विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। इस सूची में मनोरंजन और कला जगत के साथ-साथ लोक संगीत की दुनिया का भी प्रतिनिधित्व हुआ। बिहार की दिवंगत लोक गायिका शारदा सिन्हा को इस बार मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है। यह न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे बिहार और लोक संगीत की समृद्ध परंपरा के लिए गर्व का विषय है।

बिहार की गौरवशाली धरोहर

शारदा सिन्हा का नाम लोक संगीत के क्षेत्र में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी आवाज में वह जादू था, जो किसी भी दिल को छू जाए। बिहार और उत्तर भारत की लोक परंपराओं को उनके गीतों ने वैश्विक मंच तक पहुंचाया। छठ पूजा पर गाए गए उनके गीत “कांच ही बांस के बहंगिया” और “पाहिले पाहिले हम कइल छी छठी मइया” आज भी हर घर में गूंजते हैं। उन्होंने बिहार की संस्कृति और लोक संगीत को एक नई पहचान दी।

शारदा सिन्हा के योगदान के लिए उन्हें पहले ही पद्मश्री और पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका था। लेकिन अब, पद्म विभूषण प्राप्त करना यह साबित करता है कि उनका योगदान भारतीय संगीत और संस्कृति के लिए कितना बड़ा और अमूल्य था।

परिवार और बिहार के लिए गर्व का क्षण

दिवंगत शारदा सिन्हा को मरणोपरांत इस सम्मान से नवाजे जाने पर उनके परिवार ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उनके बेटे अंशुमन सिन्हा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “यह हमारे परिवार के लिए बेहद गर्व का क्षण है। मेरी मां ने अपने जीवन को संगीत और बिहार की परंपराओं को समर्पित किया। यह सम्मान न केवल उनका, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जिसने लोक संगीत को सहेजने में योगदान दिया है।”

अंशुमन ने आगे कहा कि यह बिहार के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि लोक संगीत के क्षेत्र में बिहार को तीनों सर्वोच्च नागरिक सम्मान – पद्मश्री, पद्म भूषण और अब पद्म विभूषण – प्राप्त हो चुके हैं। यह बिहार की सांस्कृतिक धरोहर और संगीत की गहराई को दर्शाता है।

लोक संगीत का उत्थान और प्रेरणा

शारदा सिन्हा जैसी शख्सियत ने यह साबित किया कि लोक संगीत केवल एक कला नहीं है, बल्कि यह समाज और संस्कृति का प्रतिबिंब है। उनकी सफलता और उनके सम्मान से नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रेरणा मिलेगी। लोक संगीत, जो आधुनिक समय में कम चर्चित होता जा रहा है, उनके योगदान और इस सम्मान के जरिए पुनर्जीवित हो सकता है।

निष्कर्ष

पद्म विभूषण से सम्मानित होने पर दिवंगत शारदा सिन्हा का नाम हमेशा के लिए भारतीय संगीत और संस्कृति के इतिहास में दर्ज हो गया है। यह केवल उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे बिहार और देश के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने जो योगदान दिया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनकी आवाज और उनके गीत हमारे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे, और लोक संगीत की धारा यूं ही बहती रहेगी।


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