महात्मा गांधी की 77वीं पुण्यतिथि पर राष्ट्र ने किया नमन, राष्ट्रपति मुर्मू, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 77वीं पुण्यतिथि पर पूरे देश ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, और कई अन्य गणमान्य नेताओं ने राजघाट जाकर बापू को श्रद्धांजलि दी। 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1948 में नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की हत्या कर दी थी।
राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पण
दिल्ली स्थित राजघाट, जहां महात्मा गांधी की समाधि बनी हुई है, वहां सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुष्पांजलि अर्पित कर बापू के आदर्शों को याद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर ट्वीट कर कहा, “बापू के विचार और उनके दिखाए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
देशभर में कार्यक्रमों का आयोजन
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में प्रार्थना सभाएं, भजन संध्याएं और रचनात्मक चर्चाएं आयोजित की गईं। गांधी जी के प्रिय भजन “वैष्णव जन तो तेने कहिए” और “रघुपति राघव राजा राम” गाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
इसके अलावा, विभिन्न सामाजिक संगठनों ने स्वच्छता अभियान, सत्याग्रह से जुड़े नाटक और शांति मार्च का आयोजन किया। कई स्थानों पर गांधी जी की शिक्षाओं को बढ़ावा देने के लिए पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई।
गांधी जी के विचार आज भी प्रासंगिक
महात्मा गांधी का जीवन और उनके विचार आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक हैं। उन्होंने सत्य, अहिंसा, प्रेम और शांति का संदेश दिया, जो आज के समय में पहले से भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उनके नेतृत्व में भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की और उनके विचारों ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला जैसे कई वैश्विक नेताओं को प्रभावित किया।
आज भी, गांधी जी की “स्वराज”, “स्वदेशी”, “स्वच्छता” और “सार्वजनिक सेवा” की अवधारणाएं समाज के विकास के लिए आवश्यक हैं। उनकी शिक्षाएं न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन में भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
शहीद दिवस का महत्व
30 जनवरी को देश शहीद दिवस के रूप में भी मनाता है, ताकि उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया जा सके, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। इस दिन, देश के कई हिस्सों में दो मिनट का मौन रखकर उन वीरों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
निष्कर्ष
महात्मा गांधी की 77वीं पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि देता है और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेता है। आज भी उनका संदेश प्रासंगिक और प्रेरणादायक है। राष्ट्रपिता को नमन करते हुए हमें उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए, ताकि हम उनके सपनों का भारत बना सकें। सत्य और अहिंसा का मार्ग ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

