दिल्ली में AAP की हार पर स्वाति मालीवाल का तंज, भाजपा नेताओं ने जीत का जश्न मनाते हुए किया हमला
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक बड़ा झटका साबित हुए। जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शानदार जीत दर्ज की, वहीं AAP को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जिनमें स्वाति मालीवाल का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और कभी अरविंद केजरीवाल की करीबी रहीं स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी की हार पर तीखा तंज कसते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर लिखा:
“अहंकार रावण का भी नहीं बचा था…”
उनका यह बयान सीधा AAP के नेतृत्व, खासकर अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार पर निशाना था।
स्वाति मालीवाल का AAP से बढ़ता फासला
स्वाति मालीवाल पहले आम आदमी पार्टी का एक महत्वपूर्ण चेहरा हुआ करती थीं, लेकिन हाल के वर्षों में पार्टी नेतृत्व से उनकी दूरियां बढ़ गई थीं। दिल्ली सरकार और AAP के कुछ नेताओं से उनके मतभेद किसी से छिपे नहीं थे। चुनावी हार के बाद उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि वह अब पार्टी की नीतियों और नेतृत्व से पूरी तरह अलग हो चुकी हैं।
उनका बयान केवल तंज नहीं बल्कि AAP के अंदरूनी हालात और नेतृत्व की नीतियों पर भी सवाल खड़े करता है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह दर्शाने की कोशिश की कि AAP की हार की वजह उसका अहंकार और आत्ममुग्धता थी।
भाजपा नेताओं ने AAP पर साधा निशाना
AAP की हार के बाद भाजपा नेताओं ने इस जीत का जश्न मनाते हुए जमकर हमले किए। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि दिल्ली की जनता ने “झूठी राजनीति” को नकार दिया और विकास के एजेंडे को चुना।
बिहार में भाजपा की सहयोगी पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी AAP पर निशाना साधते हुए लिखा:
“दिल्ली तो झांकी है, बिहार अभी बाकी है!”
उनका यह बयान यह संकेत देता है कि भाजपा अब बिहार में भी अपना दबदबा बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इसके अलावा भाजपा के कई अन्य नेताओं ने भी AAP की नीतियों पर सवाल उठाए और कहा कि दिल्ली की जनता ने “केवल वादे करने वाली सरकार” को खारिज कर दिया है।
AAP की हार के पीछे क्या वजह रही?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार AAP की हार के पीछे कई प्रमुख कारण रहे:
- शराब घोटाले का असर: दिल्ली सरकार के शराब नीति घोटाले ने AAP की ईमानदार छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया।
- ओवरकॉन्फिडेंस: AAP को लगा था कि फ्री योजनाओं से ही जनता को फिर से रिझाया जा सकता है, लेकिन जनता ने इस बार शासन की गुणवत्ता को तवज्जो दी।
- दिल्ली की बुनियादी समस्याएं: टूटी सड़कें, जलभराव, बढ़ता प्रदूषण और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे AAP सरकार के खिलाफ गए।
- भाजपा की मजबूत रणनीति: भाजपा ने चुनाव में फोकस्ड कैंपेनिंग की, जिससे जनता में विश्वास बढ़ा।
क्या AAP इस हार से सबक लेगी?
AAP की हार के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी अपनी रणनीतियों में क्या बदलाव लाती है। अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम को अब आत्ममंथन करना होगा कि आखिर जनता ने उन्हें क्यों नकार दिया?
दिल्ली की राजनीति में यह बदलाव बड़े संकेत दे रहा है। भाजपा की जीत और AAP की हार यह दर्शाती है कि अब केवल मुफ्त योजनाओं और प्रचार के सहारे चुनाव जीतना आसान नहीं है। जनता अब विकास और पारदर्शिता की राजनीति चाहती है।
आने वाले दिनों में देखना होगा कि AAP इस हार से क्या सबक लेती है और भाजपा दिल्ली की सत्ता को कैसे संभालती है।

