दिल्ली में बीजेपी की बड़ी जीत, लेकिन 9 महीने बाद बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर ने पार्टी की स्थिति पर सवाल उठाए
दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने जबरदस्त जीत हासिल की। इस जीत ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जबरदस्त जोश भर दिया। लेकिन अब, दिल्ली की इस जीत के 9 महीने बाद बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जहां बीजेपी को अलग ही सियासी समीकरणों का सामना करना पड़ रहा है। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बिहार में बीजेपी की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में बीजेपी की पकड़ उतनी मजबूत नहीं है जितनी दिल्ली या अन्य राज्यों में दिखती है।
दिल्ली में बीजेपी की सफलता
दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने आक्रामक प्रचार अभियान, नरेंद्र मोदी के करिश्मे और जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती के दम पर शानदार प्रदर्शन किया। पार्टी ने आम आदमी पार्टी (AAP) के खिलाफ मजबूत चुनावी रणनीति अपनाई और जनता को अपने पक्ष में लाने का भरसक प्रयास किया। केंद्र सरकार की योजनाओं, हिंदुत्व कार्ड और राष्ट्रवाद की राजनीति को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल किया गया। इस रणनीति का लाभ बीजेपी को मिला और उसने कई सीटों पर शानदार प्रदर्शन किया।
बिहार में अलग सियासी तस्वीर
हालांकि, बिहार में सियासी परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं। यहां राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जनता दल यूनाइटेड (JDU) और कांग्रेस जैसे मजबूत दल पहले से मौजूद हैं। बीजेपी को सत्ता में बने रहने के लिए गठबंधन का सहारा लेना पड़ता है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जदयू के साथ मिलकर सरकार बनाई थी, लेकिन बाद में नीतीश कुमार ने पाला बदल लिया और महागठबंधन के साथ सरकार बना ली। इस बदलते समीकरण ने बिहार में बीजेपी की स्थिति को कमजोर कर दिया।
प्रशांत किशोर के बयान और उनकी रणनीति
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर, जो कई चुनावी अभियानों को सफल बना चुके हैं, बिहार में बीजेपी की स्थिति को लेकर आशंकित हैं। उनका कहना है कि बिहार में बीजेपी की पकड़ उतनी मजबूत नहीं है जितनी उत्तर प्रदेश या दिल्ली में देखने को मिलती है। उनके अनुसार, बिहार में बीजेपी अभी भी दूसरे या तीसरे नंबर की पार्टी है। प्रशांत किशोर का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे खुद बिहार में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं और जमीनी हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
बीजेपी के लिए आगे की राह
बिहार में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की है। दिल्ली की तरह बिहार में सिर्फ मोदी लहर के सहारे चुनाव जीतना संभव नहीं होगा। बिहार की राजनीति जातीय समीकरणों, क्षेत्रीय मुद्दों और स्थानीय नेतृत्व पर निर्भर करती है। अगर बीजेपी को बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करनी है, तो उसे जमीनी स्तर पर संगठन को और मजबूत करना होगा और स्थानीय नेताओं को अधिक महत्व देना होगा।
निष्कर्ष
दिल्ली में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की थी, लेकिन बिहार में पार्टी को नए राजनीतिक समीकरणों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशांत किशोर की भविष्यवाणी और विश्लेषण इस ओर संकेत करते हैं कि बिहार में बीजेपी को सत्ता में वापसी के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी बिहार में अपनी रणनीति कैसे बनाती है और आगामी चुनावों में किस तरह का प्रदर्शन करती है।

