नई दिल्ली में 25वें ‘जहान-ए-खुसरो’ सूफी महोत्सव की भव्य प्रस्तुतियाँ, प्रेम और भक्ति के सुरों से गूंजा संगीत संसार

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नई दिल्ली में 25वें ‘जहान-ए-खुसरो’ सूफी महोत्सव की भव्य प्रस्तुतियाँ, प्रेम और भक्ति के सुरों से गूंजा संगीत संसार

नई दिल्ली में आयोजित 25वें ‘जहान-ए-खुसरो’ सूफी संगीत महोत्सव ने एक बार फिर प्रेम, भक्ति और संगीत का अनुपम संगम प्रस्तुत किया। यह प्रतिष्ठित महोत्सव, जो हर वर्ष सूफी संतों की परंपरा को जीवंत रखने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है, इस बार भी आध्यात्मिकता और शांति का संदेश लेकर आया। इस महोत्सव में देश-विदेश के प्रख्यात कलाकारों ने भाग लिया और अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सूफी संगीत की अनुपम विरासत

‘जहान-ए-खुसरो’ महोत्सव का आयोजन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और संगीतज्ञ मुज़फ़्फ़र अली के मार्गदर्शन में किया जाता है। इस महोत्सव का नाम सूफी संत हज़रत अमीर खुसरो के सम्मान में रखा गया है, जो भारतीय सूफी संगीत और कव्वाली के जनक माने जाते हैं। इस महोत्सव की खासियत यह है कि यह सिर्फ संगीत का आयोजन नहीं, बल्कि सूफी परंपरा, प्रेम और भक्ति की गहराइयों को महसूस करने का एक माध्यम है।

प्रेम और भक्ति के रस में डूबी प्रस्तुतियाँ

इस वर्ष महोत्सव के मंच पर कई प्रसिद्ध सूफी गायकों और कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। कुछ प्रमुख आकर्षणों में शामिल थे:

  1. अभा बनर्जी और उनकी मंडली – जिन्होंने अमीर खुसरो की रचनाओं को सुरों में पिरोकर एक अलौकिक अनुभव प्रदान किया।
  2. वडाली ब्रदर्स – जिन्होंने अपनी दमदार कव्वाली से महफिल को ऊर्जा से भर दिया।
  3. रेहाना मीर अली – जिन्होंने रूमी और बुल्ले शाह की रचनाओं को अपने मधुर स्वरों में प्रस्तुत कर सभी को भाव-विभोर कर दिया।
  4. तुर्की, ईरान और पाकिस्तान से आए कलाकारों ने भी अपनी पारंपरिक सूफी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मोह लिया।

सूफी संगीत: प्रेम और आध्यात्मिकता का संगम

सूफी संगीत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह धर्म, भाषा और सीमाओं से परे प्रेम और भक्ति का संदेश देता है। इस महोत्सव में प्रस्तुत किए गए गीतों और कव्वालियों में न केवल ईश्वर की स्तुति थी, बल्कि यह भी संदेश था कि इंसान को अपनी आत्मा से जुड़ना चाहिए और प्रेम के मार्ग पर चलना चाहिए।

सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास

‘जहान-ए-खुसरो’ महोत्सव का एक मुख्य उद्देश्य सूफी संगीत और भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को सहेजना और युवा पीढ़ी तक पहुँचाना है। आधुनिक समय में जब संगीत के स्वरूप बदल रहे हैं, ऐसे महोत्सव हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखने का कार्य करते हैं।

निष्कर्ष

25वें ‘जहान-ए-खुसरो’ महोत्सव ने एक बार फिर साबित किया कि सूफी संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार है। नई दिल्ली की ऐतिहासिक धरती पर प्रेम, भक्ति और संगीत का यह संगम सभी के दिलों को छू गया। यह महोत्सव न केवल संगीत प्रेमियों के लिए एक अनुभव था, बल्कि शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश देने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन भी था।


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