बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़ा सियासी दांव चल दिया है. नीतीश सरकार ने जातिगत जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक कर दिए हैं
बिहार में जाति की जनगणना: जानिए आबादी का अद्वितीय राज
बिहार, एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से भरपूर राज्य, भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित है जिसमें विभिन्न जातियों और समाजों की बहुतायत है। इस विविधता को समझने और सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए, बिहार सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण पहल की है – ‘जातिगत जनगणना’। इस जनगणना के आंकड़ों का प्रकाशन हाल ही में किया गया है, और यह सामाजिक और आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर रहा है।
बिहार में आबादी का एक अद्वितीय आंकड़ा है कि इसमें 36% अत्यंत पिछड़ा वर्ग और 27% पिछड़ा वर्ग है। इससे साफ होता है कि समाज में पिछड़े वर्गों का महत्वपूर्ण हिस्सा है, और इसके साथ ही इस जनगणना ने बिहार की समाजिक समृद्धि की दिशा में कई मुद्दों पर प्रकाश डाला है।
इस जनगणना से मिली जानकारी के आधार पर, सरकार सोशल वेलफेयर प्रोग्रामों और योजनाओं को समझने और उन्हें समर्थन प्रदान करने में सक्षम होगी। इससे बिहार के अत्यंत पिछड़े वर्ग और पिछड़ा वर्ग के लोगों को उनके समाजिक और आर्थिक आवश्यकताओं के आधार पर सहायता प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, जातिगत जनगणना के आंकड़े समाज की समस्याओं को समझने का माध्यम भी प्रदान करते हैं और सामाजिक न्याय और सामाजिक समृद्धि की दिशा में कदम उठाने में सहायक होते हैं। इस जनगणना के परिणामों का सही तरीके से उपयोग करके, हम समाज में सामाजिक और आर्थिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं और बिहार को एक मजबूत और समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में मदद कर सकते हैं।
इस जातिगत जनगणना की प्रमुख उद्देश्यों में से एक यह भी है कि राज्य की विकास योजनाओं को समझने में सहायता मिले। जनगणना के आंकड़ों के माध्यम से सरकार यह जान पाएगी कि कौन-कौन से क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक विकास की जरुरत है, जिससे वह योजनाएँ बना सकती है और उन्हें क्रियान्वित कर सकती है।
इस जनगणना के आंकड़े न केवल बिहार के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण हैं। भारत के विकास में सामाजिक और आर्थिक समानता की दिशा में बदलाव लाने के लिए यह जानकारी अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
इससे साफ होता है कि बिहार सरकार ने जनगणना को लेकर गंभीरता से निगरानी बनाए रखी है। जनगणना के आंकड़ों की सही जानकारी प्राप्त करना न केवल सरकारी नीतियों को मजबूत करेगा, बल्कि यह भी सामाजिक समानता, न्याय, और विकास की दिशा में एक नई किरण ला सकता है।
आखिरकार, इस जातिगत जनगणना के माध्यम से हम समझ सकते हैं कि एक समृद्ध और समाज में समाजिक समानता की कैसे स्थिति बना सकती है। यह न केवल एक आंकड़े की गणना है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है जो समाज में सभी वर्गों के लोगों के लिए बेहतर भविष्य की दिशा में मदद कर सकता है।”
जाति के आधार पर राज्य में जनसंख्या

धर्म के आधार पर जनसंख्या का आंकड़ा
क्रमांक धर्म जनसंख्या प्रतिशत



