एसकेएम ने 26 जनवरी को देशव्यापी ‘ट्रैक्टर मार्च’ का आह्वान किया, पीएम मोदी से किसानों की लंबित मांगों पर चर्चा करने का आग्रह किया

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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने 26 जनवरी, 2025 को देशभर में ‘ट्रैक्टर मार्च’ आयोजित करने की अपील की है। यह मार्च किसानों की लंबित मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की आवश्यकता को उजागर करने के लिए किया जा रहा है। एसकेएम ने यह भी मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों के साथ एक बैठक आयोजित करें ताकि उनके मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो सके और समस्याओं का समाधान निकाला जा सके।

एसकेएम का यह आह्वान एक ऐसे समय पर आया है जब किसान लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। खासकर तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों द्वारा विरोध किया गया था, जिन्हें केंद्र सरकार ने 2020 में पारित किया था। किसानों का आरोप था कि ये कानून उनके हितों के खिलाफ हैं और बड़े व्यापारियों को फायदा पहुंचाने वाले हैं। हालांकि, 2021 में इन कानूनों को वापस ले लिया गया था, फिर भी किसानों की अन्य लंबित मांगें बनी हुई हैं, जैसे कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और किसान विरोधी नीतियों को समाप्त करना।

एसकेएम ने रविवार को प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे किसानों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करें और उनके साथ बैठकर उनकी मांगों पर चर्चा करें। एसकेएम के नेताओं का कहना है कि यह समय है जब सरकार किसानों के साथ संवाद स्थापित करे और उनकी मांगों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाए। किसान संगठनों का यह भी कहना है कि सरकार ने उनके साथ किए गए कई वादों को पूरा नहीं किया, जिससे किसानों में निराशा और आक्रोश बढ़ रहा है।

26 जनवरी को होने वाला ‘ट्रैक्टर मार्च’ केवल एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि यह किसानों की एकजुटता और संघर्ष का प्रतीक बनकर उभरेगा। यह मार्च सरकार को यह संदेश देने का एक तरीका होगा कि किसान अपनी मांगों को लेकर दृढ़ और एकजुट हैं। एसकेएम का कहना है कि यह मार्च शांति और अनुशासन के साथ किया जाएगा, और इसमें किसानों की व्यापक भागीदारी होगी। उनका उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना है ताकि वह किसानों की समस्याओं का हल निकाले।

इस अपील के बाद, कई किसान संगठनों ने एसकेएम का समर्थन किया है और इस मार्च को सफल बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। कृषि संकट और किसानों के मुद्दों को लेकर यह संघर्ष अब केवल एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के किसानों की आवाज बन चुका है। इस मार्च के माध्यम से किसान एक बार फिर से सरकार से अपनी मांगों के प्रति सकारात्मक कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं।

अंततः, एसकेएम द्वारा किया गया यह आह्वान एक बड़ा सवाल खड़ा करता है: क्या सरकार किसानों के साथ समझौता करने के लिए तैयार होगी, या यह आंदोलन और बढ़ेगा? यह सवाल अब देशभर के किसानों और सरकार के बीच एक बड़े संवाद का विषय बन गया है।


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