हर साल कार्तिक माह की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली देव दीपावली काशी के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर होती है। यह पर्व विशेष रूप से काशीवासियों और देश-विदेश से आए पर्यटकों के लिए एक अनूठा अनुभव लेकर आता है। देव दीपावली को ‘देवताओं की दीपावली’ भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन काशी के घाटों पर लाखों दीप जलाए जाते हैं, जो गंगा के पानी में डूबकर एक अद्वितीय दिव्य दृश्य प्रस्तुत करते हैं। इस बार, देव दीपावली के अवसर पर काशी के घाटों पर लगभग 21 लाख दीप जलाए जाएंगे, जो इसे और भी भव्य और दिव्य बनाएंगे।
काशी की आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम
काशी, जिसे भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है, हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में एक है। यहां गंगा नदी के किनारे स्थित घाटों पर होने वाले दीपदान के दृश्य अद्भुत होते हैं। देव दीपावली के दिन, काशी में हर गंगा घाट पर दीपों की लड़ी सजाई जाती है, जो रात को गंगा के पानी में झिलमिलाती हुई मानो देवताओं का स्वागत करती हैं। यह दृश्य किसी स्वर्गीय दर्शन से कम नहीं लगता। इस दिन गंगा आरती का आयोजन भी धूमधाम से होता है, जिसमें लाखों लोग भाग लेते हैं और भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं।
काशी में देव दीपावली का आयोजन अब एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक महोत्सव बन चुका है। पिछले चार दशकों में इस परंपरा ने एक लोकपर्व का रूप ले लिया है, और इसका आकर्षण साल दर साल बढ़ता जा रहा है। इस अवसर पर न केवल भारत से, बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंचते हैं। देव दीपावली के समय काशी का माहौल भक्तिमय, उल्लासपूर्ण और अद्भुत होता है, और यह पर्व काशी की संस्कृति और धार्मिकता का बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।
21 लाख दीपों का प्रकाश
इस बार देव दीपावली पर काशी के घाटों पर कुल 21 लाख दीप जलाए जाएंगे। ये दीप काशी की गंगा में एक अद्वितीय छवि उत्पन्न करेंगे। इस विशेष आयोजन का हिस्सा बनने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंच चुके हैं। हर घाट पर दीपों की जो लड़ी सजाई जाती है, वह काशी की धार्मिक महिमा को चार चाँद लगा देती है। गंगा के पानी में जलते दीपों का प्रतिबिंब देखना एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक अनुभव होता है, जो हर व्यक्ति को एक अलौकिक अहसास देता है।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का आगमन और नमो घाट का उद्घाटन
इस बार देव दीपावली के अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी काशी पहुंचेंगे। वे इस अवसर पर काशी के नए नमो घाट का उद्घाटन करेंगे। नमो घाट का उद्घाटन काशी के विकास और धार्मिक पर्यटन को एक नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इस घाट का निर्माण विशेष रूप से गंगा की पूजा-अर्चना, धार्मिक आयोजन और पर्यटकों के लिए सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है। नमो घाट का उद्घाटन काशीवासियों के लिए गर्व का विषय होगा और यह घाट काशी के धार्मिक महत्व को और बढ़ाएगा।
निष्कर्ष
देव दीपावली काशी के लिए केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर भी बन चुकी है। यह पर्व काशी के धार्मिक और सांस्कृतिक वैभव को प्रदर्शित करता है और यहां की आस्था, विश्वास और परंपराओं को मजबूत करता है। 21 लाख दीपों से सजी गंगा, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का उद्घाटन और काशी के घाटों पर उमड़ा भक्तों का सैलाब निश्चित रूप से इस देव दीपावली को एक ऐतिहासिक और अविस्मरणीय घटना बना देगा। इस पर्व को लेकर काशी का वातावरण उल्लास और आस्था से भरपूर है, और यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर को पूरे विश्व में प्रमोट करने का एक बेहतरीन अवसर है।

