कुमार विश्वास, हिंदी साहित्य और कविता के प्रमुख हस्ताक्षरों में से एक, हमेशा अपने शब्दों के माध्यम से गहरी भावनाओं का संचार करते हैं। जब उन्होंने प्रसिद्ध गायिका शारदा सिन्हा जी को श्रद्धांजलि अर्पित की, तो उनके शब्दों में शारदा जी के प्रति गहरी श्रद्धा, सम्मान, और व्यक्तिगत संबंध की झलक दिखाई दी। शारदा सिन्हा जी, जिनकी आवाज़ ने भारतीय संगीत को एक नया आयाम दिया, विशेष रूप से बिहार और उत्तर भारत के सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में उनका योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। कुमार विश्वास ने अपनी श्रद्धांजलि में न केवल शारदा जी के गायन कला की सराहना की, बल्कि उनके व्यक्तिगत स्नेह, आत्मीयता और भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी निष्ठा को भी सम्मानित किया।
कुमार विश्वास ने शारदा सिन्हा जी के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए यह बताया कि वे केवल एक प्रसिद्ध गायिका ही नहीं थीं, बल्कि उनके परिवार के लिए वे एक बड़ी बहन की तरह थीं। यह न केवल एक पारिवारिक संबंध था, बल्कि एक आत्मीयता का भाव था, जिसमें शारदा जी ने न केवल कुमार विश्वास के घरवालों का दिल जीता, बल्कि हर छोटे-बड़े अवसर पर अपना प्यार और स्नेह भी दिखाया। कुमार विश्वास का यह अनुभव दर्शाता है कि शारदा जी का संगीत सिर्फ मंचों तक सीमित नहीं था, बल्कि वह हर दिल में बसने वाला एक सजीव एहसास था।
उनकी गायकी का प्रभाव केवल उनके प्रशंसकों पर ही नहीं, बल्कि उन लोगों पर भी था जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से उन्हें अनुभव किया। शारदा सिन्हा जी का कोकिल-कंठ, जो हर शख्स को मंत्रमुग्ध कर देता था, कुमार विश्वास के लिए घर पर भी एक अभूतपूर्व सौभाग्य था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि शारदा जी उनके घर भोजन से पहले और बाद में उनकी छोटी-छोटी इच्छाओं पर घंटों गाती रहती थीं। यह उनकी विनम्रता और कला के प्रति सच्चे समर्पण का प्रतीक था।
कुमार विश्वास ने यह भी कहा कि शारदा जी का गायन विशेष रूप से छठ पूजा से जुड़ा था। उनके बिना छठ की महिमा अधूरी मानी जाती थी। कुमार विश्वास ने शारदा जी के गायन को न केवल एक सांस्कृतिक अनुष्ठान के रूप में, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव के रूप में व्यक्त किया। यह शारदा जी की अद्वितीयता को दर्शाता है कि उनके गायन में न केवल लोक संगीत की गूंज थी, बल्कि वह एक अध्यात्मिक रस से भी भरपूर था, जो छठ के पर्व को संपूर्णता प्रदान करता था।
कुमार विश्वास की श्रद्धांजलि में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि शारदा सिन्हा जी का योगदान भारतीय संगीत और संस्कृति के लिए कितना अनमोल था। वे एक ऐसी शख्सियत थीं, जिन्होंने न केवल संगीत के माध्यम से लोगों का दिल जीता, बल्कि अपनी साधना और जीवन के प्रति समर्पण से हर किसी को प्रेरित किया। उनका संगीत एक यात्रा थी, जो हर दिल को छूने वाली थी और जो अब भी हमारे बीच मौजूद है। कुमार विश्वास ने शारदा सिन्हा जी के योगदान को न केवल एक व्यक्तिगत अनुभव के रूप में देखा, बल्कि उसे भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य हिस्सा मानते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।