कोलकाता में महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई वीभत्स घटना के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच, शहर के जूनियर डॉक्टरों ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए कांड के विरोध में प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने अब मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए अस्थायी हेल्प कैम्प खोलने का निर्णय लिया है।
इस पहल के तहत, डॉक्टरों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किए हैं, जहां वे मुफ्त चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इन हेल्प कैम्पों में प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, इलाज और दवाओं की मुफ्त सुविधा प्रदान की जा रही है। डॉक्टरों का यह कदम न केवल समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि वे अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं, भले ही वे एक गंभीर मुद्दे के विरोध में जुटे हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि यह पहल इसलिए की गई है ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को बिना किसी वित्तीय बोझ के स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। शहर के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए इन हेल्प कैम्पों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मौजूदा स्थिति के बावजूद आम लोगों को आवश्यक चिकित्सा सहायता प्राप्त हो सके। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि वे इन कैम्पों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं और समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
जूनियर डॉक्टरों की इस पहल पर स्थानीय समुदाय की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। मरीजों और उनके परिवारों ने डॉक्टरों की इस मुफ्त चिकित्सा सेवा के लिए धन्यवाद व्यक्त किया है। कई मरीजों ने बताया कि उन्हें इस समय उचित चिकित्सा सहायता मिलने से काफी राहत मिली है और उनकी समस्याओं का समाधान हो रहा है।
इस पहल की सफलता और जनसाधारण की प्रतिक्रिया को देखकर, प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने भविष्य में भी इस प्रकार की सेवाओं को जारी रखने की योजना बनाई है। डॉक्टरों ने कहा कि उनकी प्राथमिकता यह है कि वे अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए समाज के कमजोर वर्ग को भी सहारा दें।
हालांकि, इस दौरान जारी विरोध प्रदर्शन के चलते डॉक्टरों की इस पहल को लेकर कुछ लोग इस कदम की सराहना कर रहे हैं, वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाए हैं कि क्या इस प्रकार की पहल आंदोलन की मूल भावना को प्रभावित कर सकती है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने दोनों मामलों को एक साथ संभालने का निर्णय लिया है, ताकि समाज के हर वर्ग को जरूरत के समय सहायता मिल सके।
इस प्रकार की पहल न केवल चिकित्सा समुदाय की सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे मुश्किल परिस्थितियों में भी पेशेवर और सामाजिक दायित्वों को संतुलित किया जा सकता है। कोलकाता की इस स्थिति ने डॉक्टरों की प्रतिबद्धता और समाज के प्रति उनके योगदान को एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया है।

