दिल्ली के कालकाजी मंदिर में सेवादार योगेंद्र सिंह की पिटाई से मौत, केजरीवाल ने BJP सरकार से सवाल किए
दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर में शुक्रवार देर रात एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई। मंदिर में सेवा देने वाले 35 वर्षीय सेवादार योगेंद्र सिंह की कुछ अज्ञात लोगों द्वारा बेरहमी से पिटाई की गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना न केवल धार्मिक स्थल की पवित्रता को कलंकित करती है, बल्कि राजधानी दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
मंदिर में मौजूद लोगों के अनुसार, यह घटना रात लगभग 11 बजे हुई जब योगेंद्र सिंह मंदिर परिसर में नियमित सेवा में लगे हुए थे। तभी कुछ लोगों के साथ उनका विवाद हुआ, जो धीरे-धीरे उग्र रूप ले बैठा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट शुरू हो गई। हमलावरों ने उन्हें बुरी तरह पीटा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और दोषियों की पहचान की जा रही है। मंदिर प्रशासन से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।
इस दुखद घटना पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्विटर और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बीजेपी शासित केंद्र सरकार और दिल्ली की कानून व्यवस्था पर तीखा हमला बोला।
केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली में मंदिर भी अब सुरक्षित नहीं रहे। कालकाजी जैसे पवित्र स्थल पर एक सेवादार की हत्या होना बेहद शर्मनाक है। यह न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि दिल्ली में अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं। बीजेपी सरकार क्या सिर्फ चुनावी रैलियों में व्यस्त है? जनता की सुरक्षा का क्या होगा?”
उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी उपराज्यपाल और केंद्र सरकार के अधीन है, फिर भी अपराधियों को खुली छूट दी जा रही है। आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
इस घटना ने न केवल दिल्लीवासियों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि देशभर में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल उठता है कि जब मंदिर जैसे स्थानों पर भी हिंसा और हत्या की घटनाएं हो रही हैं, तो आम आदमी कैसे सुरक्षित महसूस करेगा?
अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करती है, और क्या सरकार इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह केवल एक “जांच का विषय” बनकर रह जाएगा।
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि कानून का भय अगर अपराधियों में खत्म हो जाए, तो किसी भी पवित्र स्थल की गरिमा सुरक्षित नहीं रह सकती।

