पीएम मोदी की मां के अपमान के विरोध में एनडीए ने बिहार बंद का आह्वान किया, कांग्रेस पर हमला तेज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के कथित अपमान के विरोध में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बिहार में आज सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक ‘बिहार बंद’ का आह्वान किया। यह कदम उस टिप्पणी के खिलाफ उठाया गया है, जो कथित रूप से कांग्रेस पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान की गई थी। एनडीए नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के नेताओं ने पीएम मोदी की मां के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
बंद के दौरान एनडीए घटक दलों—भाजपा, जदयू, हम और अन्य दलों—ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और दरभंगा समेत राज्य के कई शहरों में दुकानें बंद रहीं और सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर एनडीए कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर टायर जलाकर विरोध दर्ज कराया और केंद्र व राज्य सरकारों से कांग्रेस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने प्रेस वार्ता में कहा, “कांग्रेस की राजनीति अब इतनी नीचे गिर चुकी है कि वे एक मां को अपशब्द कहने से भी नहीं हिचकिचा रहे। यह न सिर्फ प्रधानमंत्री का अपमान है, बल्कि भारत की संस्कृति और मां के सम्मान का अपमान भी है।”
जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और कहा कि विरोध केवल राजनीतिक नहीं है, यह नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए है। जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, “हमारे समाज में मां को देवतुल्य माना जाता है। किसी भी नेता की मां को गाली देना राजनीति का पतन है।”
हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके किसी भी नेता ने पीएम मोदी की मां के खिलाफ कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है। पार्टी प्रवक्ताओं ने इसे एनडीए द्वारा जनता का ध्यान भटकाने की साजिश बताया है।
बिहार बंद के दौरान कुछ जगहों पर एनडीए और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के बीच मामूली झड़प की खबरें भी सामने आई हैं, लेकिन कुल मिलाकर बंद शांतिपूर्ण रहा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मुद्दे अब आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। मां के अपमान जैसे भावनात्मक मुद्दे आम जनता को सीधे प्रभावित करते हैं और राजनीतिक दल इनका उपयोग अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए करते हैं।
यह देखना अब दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस पूरे विवाद से कैसे निपटती है और एनडीए इस आंदोलन को कितनी दूर तक ले जाता है।

