प्रशांत किशोर का अब तक का सबसे निजी इंटरव्यू: जानिए जीवन, सोच और राजनीति के अनसुने पहलुओं की कहानी
राजनीतिक रणनीति की दुनिया में एक ऐसा नाम है, जिसने पिछले एक दशक में भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी — प्रशांत किशोर। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस शांत, सधे और विश्लेषणात्मक चेहरे के पीछे कैसा इंसान है? हाल ही में दिए गए उनके सबसे निजी इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने अपने जीवन, सोच और राजनीति को लेकर कई ऐसे पहलू साझा किए, जो अब तक सामने नहीं आए थे।
बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
प्रशांत किशोर का जन्म बिहार के बक्सर जिले में हुआ। एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रशांत ने बताया कि उनके जीवन की शुरुआती कठिनाइयों ने ही उन्हें संघर्ष और अनुशासन सिखाया। उनके पिता डॉक्टर थे और उन्होंने प्रशांत को पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित किया।
“मैंने अपने पिता को रोज़ मरीजों की सेवा करते देखा। वहीं से मेरे अंदर समाज के लिए कुछ करने की भावना आई,” उन्होंने कहा।
करियर की शुरुआत और बदलता रास्ता
प्रशांत किशोर ने एक पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। वे संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसी संस्था के साथ काम कर चुके हैं। लेकिन राजनीति में उनकी एंट्री 2011-12 के दौर में हुई, जब उन्होंने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘चाय पर चर्चा’ जैसे कैंपेन डिजाइन किए।
“राजनीति में मेरी दिलचस्पी रणनीति से थी, सत्ता से नहीं,” उन्होंने साफ शब्दों में कहा।
चुनावी राजनीति से रणनीति तक
प्रशांत किशोर ने कई बड़े नेताओं के लिए चुनावी रणनीतियां बनाई — नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और हाल ही में कई क्षेत्रीय दलों के साथ भी काम किया। उन्होंने कहा, “हर नेता की सोच अलग होती है, लेकिन जनता की नब्ज एक ही रहती है — विकास, सुरक्षा और सम्मान।”
उनके मुताबिक, चुनाव जीतने का असली तरीका है जनता की ज़रूरतों को समझना और उन्हें विश्वसनीय समाधान देना।
राजनीति में खुद की भूमिका
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे कभी खुद चुनाव लड़ेंगे, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं नेता बनने के लिए नहीं, बदलाव लाने के लिए काम करता हूं। लेकिन भविष्य क्या मोड़ लेगा, ये कहना मुश्किल है।”
हालांकि, उनकी संस्था ‘जन सुराज’ के माध्यम से वे बिहार में एक बड़ा सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन चला रहे हैं, जो पारंपरिक राजनीति से हटकर जनता की भागीदारी को प्राथमिकता देता है।
निजी जीवन और सोच
प्रशांत किशोर ने अपने निजी जीवन के बारे में ज्यादा बात नहीं की, लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि वे बहुत ही निजी और सीमित जीवन जीना पसंद करते हैं। “मैं अब भी खुद को एक छात्र मानता हूं, जो हर दिन कुछ नया सीखता है,” उन्होंने बड़ी सादगी से कहा।
निष्कर्ष
प्रशांत किशोर का यह इंटरव्यू केवल एक राजनीतिक रणनीतिकार की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की सोच को दर्शाता है जो सत्ता से ज़्यादा परिवर्तन और जिम्मेदारी में विश्वास रखता है। उनकी बातें न केवल प्रेरणादायक हैं, बल्कि यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि राजनीति केवल कुर्सी की नहीं, समाज की सेवा की भी ज़मीन हो सकती है।

