जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला है। एक चुनावी सभा के दौरान, प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार को ‘बेशर्म आदमी’ कहा और उन पर मुसलमानों के साथ धोखा करने का गंभीर आरोप लगाया। यह हमला खासतौर पर बिहार के चार विधानसभा सीटों के उपचुनाव से जुड़ा हुआ था, जहां नीतीश कुमार ने मुस्लिम समुदाय से समर्थन मांगते हुए उनके प्रति अपनी पार्टी की नीतियों को लेकर बयान दिए थे।
प्रशांत किशोर का कहना था कि नीतीश कुमार की राजनीति में एक गहरी चालाकी है, जिसका उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को अपनी ओर आकर्षित करना है, जबकि असल में वह उन समुदायों के प्रति अपनी नीतियों में बदलाव लाने से भी कतराते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने हमेशा मुस्लिम समुदाय को अपनी राजनीतिक ज़रूरतों के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन उनके वास्तविक कामों से मुसलमानों को कोई फायदा नहीं हुआ। प्रशांत किशोर के अनुसार, नीतीश कुमार का यह रवैया एक प्रकार से धोखाधड़ी जैसा है, क्योंकि वे एक ओर मुसलमानों से समर्थन मांगते हैं, जबकि दूसरी ओर उनकी नीतियां और कार्यकलाप उनकी स्थिति को सुधारने में नाकाम रहे हैं।
किशोर ने यह भी कहा कि बिहार में जेडीयू की सरकार को अब यह समझ में आ गया है कि मुस्लिम वोटों के बिना चुनाव जीतना मुश्किल है, इसलिए अब नीतीश कुमार अपने पुराने सहयोगियों से किनारा करके मुस्लिम समुदाय से फिर से समर्थन मांग रहे हैं। यह बयान उन्होंने उन चुनावी प्रचार अभियानों के संदर्भ में दिया था, जिसमें नीतीश कुमार ने मुसलमानों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तात्कालिक समर्थन की अपील की थी।
इसके अलावा, प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के इस तरह के बयान और चुनावी रणनीतियां बिहार में राजनीतिक भ्रष्टाचार और गिरती हुई नैतिकता को उजागर करती हैं। उनका आरोप था कि नीतीश कुमार की सरकार पिछले कुछ सालों से केवल अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं के साथ खेल रही है, और कभी भी उनके कल्याण के लिए स्थायी और ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। किशोर ने कहा कि यदि नीतीश कुमार सच में मुस्लिम समुदाय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाना चाहते हैं, तो उन्हें अपने कार्यों से यह सिद्ध करना होगा, न कि केवल चुनावी लाभ के लिए एकतरफा बयानबाजी करनी होगी।
इस बयान के बाद, नीतीश कुमार और उनके समर्थक राजनीतिक गलियारों में कड़ी प्रतिक्रिया देने की स्थिति में आ गए हैं। जेडीयू के नेताओं ने प्रशांत किशोर के आरोपों को सिरे से नकारा करते हुए इसे उनके राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बताया। वहीं, प्रशांत किशोर ने भी अपनी टिप्पणी से पीछे हटने का नाम नहीं लिया और कहा कि वह हमेशा जनहित की राजनीति में विश्वास करते हैं, और उनकी आलोचना का उद्देश्य सिर्फ बिहार के आम लोगों के हितों को सामने लाना है।
इस राजनीतिक घमासान ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में गर्माहट बढ़ा दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नीतीश कुमार की सरकार मुसलमानों के लिए अपने वादों को पूरा करने में सक्षम होगी, या फिर यह एक और चुनावी रणनीति मात्र साबित होगी।

