बलूच नेता मीर यार बलोच ने आजादी की घोषणा की, दुनिया से बलूचिस्तान के निर्णय पर चुप न रहने की अपील
बलूचिस्तान में दशकों से चल रहे राजनीतिक असंतोष और अलगाववादी आंदोलन ने बुधवार को एक नया मोड़ ले लिया जब प्रमुख बलूच नेता मीर यार बलोच ने पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी की औपचारिक घोषणा कर दी। उन्होंने यह घोषणा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए की, जिसमें उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान के लोगों ने अपना राष्ट्रीय निर्णय ले लिया है और अब विश्व समुदाय को इस मुद्दे पर चुप नहीं रहना चाहिए।
मीर यार बलोच का यह बयान न केवल बलूच आंदोलन के लिए एक निर्णायक क्षण है, बल्कि यह क्षेत्रीय राजनीति में भी एक बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान के लोग वर्षों से उत्पीड़न, शोषण और मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम अपने पैरों पर खड़े हों और एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें।”
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन वहां के निवासियों का लंबे समय से आरोप है कि केंद्र सरकार उनके संसाधनों का शोषण करती है और उन्हें विकास से वंचित रखा गया है। बलूच राष्ट्रवादी संगठनों और नेताओं का यह भी आरोप रहा है कि पाकिस्तानी सेना बलूच नागरिकों के साथ क्रूरता से पेश आती है, जिसमें जबरन गायब करना, फर्जी एनकाउंटर और यातनाएं शामिल हैं।
मीर यार बलोच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह बलूचिस्तान की आवाज़ को सुने और बलूच जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, अमेरिका, और अन्य वैश्विक शक्तियों से आग्रह किया कि वे बलूचिस्तान के प्रति अपनी चुप्पी तोड़ें और इस मुद्दे को वैश्विक मंचों पर उठाएं।
उनकी इस घोषणा के बाद बलूच समुदाय के कई समूहों और प्रवासी बलूच नेताओं ने उनका समर्थन व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर हैशटैग #FreeBalochistan फिर से ट्रेंड करने लगा है और विभिन्न देशों में रहने वाले बलूच समर्थकों ने रैलियों और सभाओं का आयोजन करना शुरू कर दिया है।
हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने अब तक मीर यार बलोच की इस घोषणा पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन जानकारों का मानना है कि इस तरह की घोषणा को पाकिस्तान सरकार और सेना गंभीरता से लेगी और इसका असर सुरक्षा और कूटनीति दोनों पर पड़ सकता है।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह घोषणा बलूचिस्तान के लिए किसी नई शुरुआत की ओर इशारा करती है, या फिर यह भी अतीत की तरह किसी संघर्ष में ही सिमट कर रह जाएगी। लेकिन एक बात साफ है — बलूचिस्तान की आजादी की मांग अब और मुखर हो गई है, और दुनिया अब इसे अनदेखा नहीं कर सकती।

