महाराष्ट्र महायुति सरकार में दरार? उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ‘टांगा पलटने’ वाले बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल

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महाराष्ट्र महायुति सरकार में दरार? उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ‘टांगा पलटने’ वाले बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल

महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सबकुछ सही नहीं चल रहा है। बीते कुछ दिनों में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बयानों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। हाल ही में उन्होंने ‘टांगा पलटने’ वाला बयान दिया था, जिसे लेकर कई राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या महाराष्ट्र की सरकार में अंदरूनी कलह बढ़ रही है?

महायुति सरकार में सब कुछ ठीक नहीं?

महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की महायुति सरकार बनी है। हालांकि, इस गठबंधन के बीच आंतरिक मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं। सरकार बनने के बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार, विभागों के बंटवारे और सत्ता संतुलन को लेकर कई बार असहमति देखने को मिली है।

एकनाथ शिंदे, जो खुद शिवसेना के एक बड़े धड़े को लेकर भाजपा के साथ आए थे, अब अपने असंतोष को खुलकर व्यक्त करने लगे हैं। उनके हालिया बयानों से यह संकेत मिलता है कि वे सरकार के अंदर किसी न किसी बात को लेकर नाराज हैं।

‘टांगा पलटने’ वाले बयान का मतलब क्या?

शुक्रवार को एकनाथ शिंदे ने अपने दो दिन पुराने बयान को फिर दोहराया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “अगर टांगा ठीक से नहीं चलता तो उसे पलट दिया जाता है।” इस बयान को लेकर कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की ओर इशारा हो सकता है।

शिंदे गुट के कई नेता भी यह मान रहे हैं कि उन्हें भाजपा से उतना समर्थन नहीं मिल रहा है, जितनी उन्होंने उम्मीद की थी। इसके अलावा, अजित पवार के एनसीपी में शामिल होने के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) की स्थिति कमजोर पड़ गई है। इससे एकनाथ शिंदे और उनके समर्थकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

भाजपा की रणनीति और शिंदे की नाराजगी

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा महाराष्ट्र में अपने प्रभाव को बनाए रखना चाहती है, लेकिन वह शिंदे और अजित पवार के बीच संतुलन बनाने में संघर्ष कर रही है। भाजपा के कुछ नेताओं का मानना है कि शिंदे गुट की उपयोगिता धीरे-धीरे कम हो रही है, क्योंकि अब अजित पवार और उनके समर्थकों के आने से भाजपा के पास ज्यादा विकल्प हैं।

वहीं, एकनाथ शिंदे को डर है कि अगर भाजपा ने उनका साथ छोड़ दिया, तो उनकी शिवसेना कमजोर पड़ सकती है और आगामी चुनावों में उन्हें भारी नुकसान हो सकता है।

आगे क्या होगा?

  • क्या शिंदे भाजपा से दूरी बनाएंगे?
  • क्या महायुति सरकार में बदलाव होगा?
  • क्या शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) के बीच सीधा टकराव होगा?

इन सभी सवालों का जवाब आने वाले दिनों में मिल सकता है। फिलहाल, महाराष्ट्र की राजनीति में ‘टांगा पलटने’ वाला बयान एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत हो सकता है।


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