राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कच्छ के रण में सफेद रेगिस्तान का भ्रमण किया, स्थानीय कारीगरों से की मुलाकात

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कच्छ के रण में सफेद रेगिस्तान का भ्रमण किया, स्थानीय कारीगरों से की मुलाकात

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हाल ही में गुजरात के कच्छ जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध रण की यात्रा की। यह सफेद रेगिस्तान के रूप में प्रसिद्ध कच्छ का रण, अपनी बेमिसाल सुंदरता और विशालता के लिए जाना जाता है। राष्ट्रपति मुर्मु ने यहां के अनूठे परिदृश्य का आनंद लिया और साथ ही स्थानीय कारीगरों से मुलाकात की, जिनकी कला और शिल्प के लिए कच्छ क्षेत्र जाना जाता है। उनका यह दौरा न केवल पर्यावरणीय सौंदर्य का अनुभव था, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और कारीगरी को समझने का भी एक अनोखा अवसर था।

कच्छ का रण और राष्ट्रपति का दौरा

कच्छ का रण विशेष रूप से अपनी सफेद मिट्टी की सतह के लिए मशहूर है, जो बारिश के मौसम में झील के रूप में बदल जाता है और गर्मी में यह पूरी तरह से सूख जाता है, जिससे यहां सफेद रेगिस्तान का दृश्य उत्पन्न होता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस अद्वितीय प्राकृतिक धरोहर का दौरा करते हुए रण के भव्य दृश्य का आनंद लिया। उन्हें कच्छ के रण की प्राकृतिक सुंदरता ने मंत्रमुग्ध कर दिया, और उन्होंने यहां के अद्वितीय पर्यावरण और ऐतिहासिक महत्व की सराहना की। इस दौरान, उन्होंने स्थानीय संस्कृति और लोगों के जीवन के बारे में भी जाना।

स्थानीय कारीगरों से मुलाकात

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने दौरे के दौरान गुजरात टूरिज्म टेंट सिटी में भी ठहराव लिया, जहां विभिन्न स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियां प्रदर्शित की जा रही थीं। कच्छ क्षेत्र की कारीगरी विश्व प्रसिद्ध है, खासकर उसकी विशेष कढ़ाई, मीनाकारी, और कच्छी कला के अद्भुत नमूने। उन्होंने इन कारीगरों से मुलाकात की और उनकी कला को सराहा। स्थानीय कारीगरों ने अपनी पारंपरिक कला और शिल्प से जुड़ी चुनौतियों और उनके प्रयासों को साझा किया, जिस पर राष्ट्रपति मुर्मु ने उन्हें प्रोत्साहित किया।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कारीगरों से बातचीत करते हुए उनके काम को उत्कृष्ट बताया और कहा कि कच्छ के कारीगरों की कला भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी कला को न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिलनी चाहिए। इस प्रकार, राष्ट्रपति के दौरे ने न केवल स्थानीय कला को बढ़ावा दिया, बल्कि कारीगरों के काम को सम्मानित करने का भी कार्य किया।

समाज और संस्कृति के प्रति सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह दौरा समाज और संस्कृति के प्रति उनकी गहरी समझ और सम्मान को दर्शाता है। उन्होंने इस दौरान यह भी बताया कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखना और उसका सम्मान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। कच्छ के रण और वहां के कारीगरों से जुड़ी परंपराओं का संरक्षण देश के सांस्कृतिक ताने-बाने को मजबूत बनाने में मदद करेगा।

निष्कर्ष

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का कच्छ के रण का दौरा और स्थानीय कारीगरों से मुलाकात उनके नेतृत्व और भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के प्रति उनके समर्पण को प्रदर्शित करता है। इस यात्रा ने कच्छ के अद्वितीय पर्यावरण और कला को पुनः लोगों के बीच लाने का काम किया है। इससे न केवल कच्छ की संस्कृति को सम्मान मिला, बल्कि भारतीय कला और कारीगरी की विविधता को भी बढ़ावा मिला है। इस यात्रा से यह संदेश भी मिला कि जब हम अपने संस्कृति और पर्यावरण को समझते हैं, तो हम अपनी जड़ों से जुड़ते हैं और उसे आगे बढ़ाते हैं।


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