वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को दुलारी देवी ने गिफ्ट की साड़ी, बजट दिवस पर पहनकर दी सांस्कृतिक सम्मान

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को दुलारी देवी ने गिफ्ट की साड़ी, बजट दिवस पर पहनकर दी सांस्कृतिक सम्मान

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जब 2025 का बजट संसद में प्रस्तुत किया, तो उनकी उपस्थिति ने न केवल वित्तीय रणनीतियों को सुर्खियों में लाया, बल्कि उनके पहनावे ने भी सांस्कृतिक सम्मान और भारतीय कला के प्रति श्रद्धा का संदेश दिया। इस दिन खास बात यह रही कि उन्होंने जो साड़ी पहनी थी, वह खास तो थी ही, साथ ही इसके पीछे एक गहरी भावना भी छिपी हुई थी।

वह साड़ी, जो वित्त मंत्री ने बजट पेश करते समय पहनी थी, दरअसल उन्हें बिहार की प्रसिद्ध मिथिला चित्रकला की महारथी और पद्मश्री पुरस्कार विजेता, दुलारी देवी ने गिफ्ट की थी। दुलारी देवी, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से मिथिला चित्रकला को दुनियाभर में पहचान दिलाई है, यह साड़ी सीतारमण को एक उपहार के रूप में भेंट की थी। इस साड़ी की विशेषता सिर्फ इसकी डिज़ाइन में नहीं थी, बल्कि इसकी बुनाई और चित्रकारी में भी मिथिला कला की अद्भुत छवि थी, जो पारंपरिक भारतीय कला की सुंदरता और गहरी सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाती थी।

निर्मला सीतारमण का इस साड़ी को पहनना केवल एक फैशन चॉइस नहीं था, बल्कि यह भारतीय कला के प्रति सम्मान और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक था। इस साड़ी में मिथिला चित्रकला के द्वारा दर्शाए गए धार्मिक और लोककथात्मक चित्रों ने न सिर्फ भारतीय संस्कृति को सम्मानित किया, बल्कि यह एक संदेश भी दिया कि आर्थिक विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।

दुलारी देवी की कृतियों ने सदियों पुरानी मिथिला कला को पुनर्जीवित किया है, और उनकी कला में भारतीय समाज और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं का खूबसूरत चित्रण मिलता है। निर्मला सीतारमण ने इस साड़ी को पहनकर इस कला को न सिर्फ सराहा, बल्कि एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म पर इसे प्रस्तुत किया, जिससे यह कला अधिक प्रमुखता से सामने आई। यह पहल भारतीय कला को वैश्विक मंच पर ले जाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम था।

निर्मला सीतारमण का इस साड़ी में संसद में उपस्थित होना एक संदेश देता है कि जब हम अपने आर्थिक उद्देश्यों की दिशा तय करते हैं, तो हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर को भी सहेजने और उसे बढ़ावा देने की जिम्मेदारी समझनी चाहिए। यह कदम इस बात का प्रतीक था कि भारत का विकास केवल आधुनिकता और आर्थिक उन्नति से ही नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है।

दुलारी देवी द्वारा दी गई इस साड़ी के माध्यम से निर्मला सीतारमण ने न केवल भारतीय कला को समर्पित किया, बल्कि यह भी प्रदर्शित किया कि कला और संस्कृति का सम्मान हर क्षेत्र में होना चाहिए, चाहे वह राजनीति हो या वित्तीय नीति। यह साड़ी एक सांस्कृतिक संवाद का हिस्सा बन गई, जिसने भारतीयता के प्रति एक गहरा जुड़ाव दर्शाया।


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