स्वर्ण मंदिर में सुरक्षा मॉक ड्रिल के तहत ब्लैकआउट, आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की तैयारी परखी गई बुधवार रात
बुधवार रात अमृतसर स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री हरमंदिर साहिब, जिसे स्वर्ण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, में एक विशेष सुरक्षा मॉक ड्रिल के तहत ब्लैकआउट किया गया। यह सुरक्षा अभ्यास स्थानीय प्रशासन, पंजाब पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा बलों की तत्परता और समन्वय का परीक्षण करना था।
रात करीब 10 बजे के आसपास, बिना किसी पूर्व सार्वजनिक सूचना के, स्वर्ण मंदिर परिसर की सभी लाइटें बंद कर दी गईं। अचानक हुए इस ब्लैकआउट से परिसर में मौजूद श्रद्धालु थोड़े समय के लिए अचंभित रह गए, लेकिन जल्द ही सुरक्षा कर्मियों द्वारा उन्हें शांत और संयमित रहने का अनुरोध किया गया। मॉक ड्रिल की सूचना मिलते ही वातावरण में फैला असमंजस दूर हो गया और श्रद्धालुओं ने सहयोगात्मक रवैया अपनाया।
इस दौरान पूरे स्वर्ण मंदिर परिसर में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई थी। विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो दस्ते और बम निरोधक इकाइयाँ भी तैनात थीं। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी निगरानी के माध्यम से पूरे अभ्यास की बारीकी से निगरानी की गई। मॉक ड्रिल के अंतर्गत विभिन्न आपातकालीन परिदृश्यों की कल्पना की गई, जिनमें आतंकवादी हमला, विस्फोटक पदार्थों की मौजूदगी और भीड़ नियंत्रण जैसे हालात शामिल थे।
इस अभ्यास का उद्देश्य न केवल सुरक्षा बलों की त्वरित प्रतिक्रिया को परखना था, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना था कि ऐसी किसी स्थिति में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह मॉक ड्रिल केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों के तहत समय-समय पर आयोजित की जाती है, ताकि संवेदनशील धार्मिक स्थलों की सुरक्षा में कोई चूक न हो।
स्वर्ण मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर पिछले कुछ वर्षों में सतर्कता और भी बढ़ी है, खासकर जब से देश में आतंकी गतिविधियों की आशंका के चलते सुरक्षा एजेंसियों ने अपने निगरानी तंत्र को और मजबूत किया है। अमृतसर पुलिस आयुक्त ने कहा, “यह अभ्यास हमारी समग्र सुरक्षा व्यवस्था का एक हिस्सा है। श्रद्धालुओं का सहयोग सराहनीय रहा और हम भविष्य में भी इस तरह के ड्रिल्स को जारी रखेंगे।”
स्वर्ण मंदिर प्रबंधन कमेटी ने भी मॉक ड्रिल का समर्थन करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और ऐसे प्रयासों से न केवल सुरक्षा तंत्र मजबूत होता है, बल्कि लोगों में जागरूकता भी बढ़ती है। गुरुद्वारा परिसर में मौजूद सेवादारों और वालंटियरों ने भी इस अभ्यास में सहयोग किया और श्रद्धालुओं को सही जानकारी व मार्गदर्शन प्रदान किया।
इस तरह के मॉक ड्रिल्स यह सुनिश्चित करते हैं कि भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थलों की सुरक्षा में कोई कोताही न हो और आपात स्थिति में सभी एजेंसियां समन्वय के साथ तेजी से प्रतिक्रिया दे सकें।

