सिद्धारमैया ने चिन्नास्वामी भगदड़ के लिए क्रिकेट एसोसिएशन को घेरा, बीजेपी पर महाकुंभ की भगदड़ का दिया हवाला
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हाल ही में बेंगलुरु के प्रसिद्ध एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ को लेकर क्रिकेट एसोसिएशन को आड़े हाथों लिया है। यह भगदड़ उस समय हुई जब बड़ी संख्या में लोग आईपीएल टिकट खरीदने के लिए स्टेडियम के बाहर इकट्ठा हुए थे। इस दौरान अफरातफरी मच गई, जिससे कई लोग घायल हो गए। मुख्यमंत्री ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर क्रिकेट एसोसिएशन को जिम्मेदार ठहराया और उसकी अव्यवस्था की कड़ी आलोचना की।
सिद्धारमैया ने कहा कि इतने बड़े आयोजन के दौरान उचित प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना आयोजकों की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि टिकट वितरण की व्यवस्था को और सुव्यवस्थित किया गया होता, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना टाली जा सकती थी। उन्होंने क्रिकेट एसोसिएशन से पूछा कि क्या उन्होंने पहले से भीड़ प्रबंधन के लिए कोई समुचित योजना बनाई थी या नहीं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन जब आयोजक खुद ही भीड़ को नियंत्रित करने में विफल हो जाते हैं, तो हादसे होना स्वाभाविक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में भीड़ नियंत्रण एक गंभीर विषय है और इसके लिए समर्पित रणनीति की आवश्यकता होती है।
इस मुद्दे पर बीजेपी द्वारा सरकार की आलोचना किए जाने पर सिद्धारमैया ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को पहले अपनी जिम्मेदारियों की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “बीजेपी महाकुंभ की भगदड़ को भूल गई है, जहाँ सैकड़ों लोग मारे गए थे। क्या तब उन्होंने अपनी सरकार की जिम्मेदारी स्वीकारी थी?” इस बयान के ज़रिए मुख्यमंत्री ने विपक्ष की दोहरी मानसिकता की ओर इशारा किया।
सिद्धारमैया ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी करेगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे क्रिकेट एसोसिएशन से जवाब-तलब करें और भीड़ नियंत्रण के लिए एक स्थायी नीति तैयार करें।
इस बीच, सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। जनता ने भी आयोजकों की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं और यह मांग की है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए डिजिटल टिकटिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं का इस्तेमाल किया जाए।
कुल मिलाकर, चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बड़े आयोजनों में केवल भीड़ नहीं, बल्कि सोच और व्यवस्था की भी परीक्षा होती है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बयान ने न केवल आयोजकों को चेताया है, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी एक नई बहस को जन्म दिया है।

