बिहार के पीरपैंती में अदाणी पावर लगाएगा 2,400 मेगावाट का प्लांट, करेगा 3 अरब डॉलर का बड़ा निवेश
अदाणी ग्रुप की कंपनी अदाणी पावर लिमिटेड ने बिहार में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बड़ा निवेश करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती में 2,400 मेगावाट क्षमता वाला अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट स्थापित करेगी। इस परियोजना में कंपनी करीब 3 अरब डॉलर (लगभग ₹26,482 करोड़) का निवेश करेगी।
क्या है अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट?
अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट पारंपरिक थर्मल पावर प्लांट्स की तुलना में अधिक दक्षता के साथ काम करते हैं। इन प्लांट्स में उच्च तापमान और दबाव पर भाप उत्पन्न की जाती है, जिससे ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया अधिक कुशल होती है और कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है।
बिहार को क्या मिलेगा इस निवेश से?
इस निवेश का सीधा लाभ बिहार की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली को मिलेगा। बिहार राज्य में अभी भी बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बना हुआ है। अदाणी पावर द्वारा लगाए जाने वाला यह पावर प्लांट राज्य को न सिर्फ स्थायी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, बल्कि इससे स्थानीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
कंपनी ने बिहार स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) के साथ 25 साल का पावर सप्लाई एग्रीमेंट (PSA) भी साइन किया है। इस समझौते के तहत पीरपैंती में बनने वाले पावर प्लांट से उत्पन्न बिजली राज्य में सप्लाई की जाएगी। इससे बिहार के औद्योगिक, शहरी और ग्रामीण इलाकों को लाभ मिलेगा।
स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
इस परियोजना के कारण स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। निर्माण कार्य के दौरान और बाद में संचालन के लिए इंजीनियरिंग, तकनीकी और सहायक कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, जिससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
राज्य सरकार और अदाणी समूह की साझेदारी
बिहार सरकार और अदाणी समूह के बीच यह साझेदारी राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। सरकार की ऊर्जा नीति के तहत निजी निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाई जा सके।
निष्कर्ष
बिहार के पीरपैंती में अदाणी पावर द्वारा 2,400 मेगावाट का अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट लगाना न केवल राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगा, बल्कि यह परियोजना आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल साबित होगी। यह निवेश बिहार को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

