बिहार चुनाव परिणाम: प्रशांत किशोर के ‘जन सुराज’ का खाता भी नहीं खुला, पीके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी भविष्य की रणनीति की जानकारी।

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बिहार चुनाव: जन सुराज का खाता तक नहीं खुला, प्रशांत किशोर ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए बताई भविष्य की ‘बदलाव’ रणनीति!

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने प्रचंड बहुमत हासिल किया, वहीं चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (पीके) की पार्टी जन सुराज को करारा झटका लगा है। तीन साल की पदयात्रा और बड़े दावों के बावजूद, जन सुराज पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई, जिससे बिहार की राजनीति में एक नए वैकल्पिक बल की उम्मीदें धराशायी हो गईं।

पीके ने स्वीकारी हार, लिया 100% ज़िम्मेदारी

चुनाव नतीजों के बाद, मंगलवार को प्रशांत किशोर ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने हार को स्वीकार करते हुए इसकी पूरी जिम्मेदारी ली। पीके ने कहा, “हमने ईमानदार प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसे स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है। जनता ने हम पर भरोसा नहीं जताया, तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी मेरी है। मैं यह जिम्मेदारी 100% अपने ऊपर लेता हूँ कि मैं बिहार की जनता का विश्वास नहीं जीत पाया।”

हालांकि, पार्टी ने राज्यव्यापी स्तर पर 3.5 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर हासिल किया है, जो कई छोटी पार्टियों से बेहतर है, लेकिन 238 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद एक भी सीट न जीत पाना निराशाजनक रहा।

हार के कारण और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप

पीके ने अपनी हार के कारणों का विश्लेषण करते हुए NDA की जीत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यह जनादेश सरकार के काम पर नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और अंतिम समय में हुए वोट शिफ्ट के कारण आया है।

  • जंगलराज का डर: जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सत्ता में लौटने की आशंका और ‘जंगलराज’ के डर का प्रचार करके NDA ने आखिरी समय में जन सुराज के समर्थकों के वोट अपनी ओर मोड़ लिए।

  • वोटों की खरीद: प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि NDA सरकार ने चुनाव के दौरान जनता के पैसे का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में करीब 60 से 62 हजार लोगों को 10,000 रुपये नकद दिए गए, जिसके लिए करीब 40,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए। पीके ने कहा कि चुनाव आयोग को भी इस पर ध्यान देना चाहिए।

भविष्य की रणनीति: राजनीति नहीं छोड़ेंगे, लड़ेंगे दोगुने दम से

करारी हार के बावजूद, प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि वह बिहार की राजनीति छोड़ने वाले नहीं हैं। उन्होंने ‘बिहार को बदलने’ के अपने संकल्प को दोहराया और अपनी भविष्य की रणनीति स्पष्ट की:

  1. प्रायश्चित के लिए उपवास: पीके ने कहा कि वह जनता का विश्वास न जीत पाने के प्रायश्चित के तौर पर 20 नवंबर को भीतरहरवा आश्रम से एक दिन का सामूहिक मौन उपवास रखेंगे।

  2. सक्रिय विपक्ष की भूमिका: उन्होंने घोषणा की कि विधानसभा में प्रतिनिधित्व न होने के बावजूद, जन सुराज पार्टी एक मजबूत वैकल्पिक विपक्ष की भूमिका निभाएगी।

  3. किए गए वादों पर दबाव: पीके ने सरकार को चुनौती दी कि यदि उन्होंने महिलाओं को ₹10,000 देने के अलावा ₹2 लाख देने का वादा किया है, तो वे उसे पूरा करें। उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह वादा पूरा कर देती है तो वह राजनीति छोड़ देंगे।

प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया, “जो लोग ऐसा सोचते हैं कि मैं बिहार छोड़ दूंगा तो वे भ्रम में न रहें। कोई तब तक नहीं हारता, जब तक वह छोड़ता नहीं। जब तक बिहार को सुधारने की जिद पूरी न कर लें, तब तक बिहार छोड़ेंगे नहीं।”


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