न्याय की तलाश, राजनीति नहीं: व्यक्तिगत पीड़ा को लेकर ज्योति सिंह ने प्रशांत किशोर से की मुलाकात | वीडियो
हाल ही में पटना में एक मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी, जब भोजपुरी अभिनेता और सांसद पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने जन सुराज अभियान के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन ज्योति सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी यह यात्रा राजनीति से प्रेरित नहीं थी, बल्कि उनका उद्देश्य केवल न्याय की मांग करना है।
ज्योति सिंह ने मीडिया से बातचीत में साफ शब्दों में कहा, “मैं यहां टिकट मांगने नहीं, बल्कि अपने लिए और उन सभी महिलाओं के लिए न्याय की मांग करने आई हूं, जो चुपचाप अत्याचार सहती हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि यह मुलाकात किसी राजनीतिक लाभ या चुनावी मंशा के तहत नहीं की गई है।
इस मुलाकात के बाद यह सवाल उठना लाज़मी था कि क्या ज्योति सिंह राजनीति में आने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि उन्होंने हर तरह की राजनीतिक अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता नारी सुरक्षा और सम्मान है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे चाहती हैं कि बिहार की कोई भी महिला वही दर्द न सहे जो उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन में सहा है।
प्रशांत किशोर ने भी इस मुलाकात के बाद एक बयान में कहा कि वे किसी के व्यक्तिगत मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते, लेकिन अगर कोई महिला अपने साथ हुए अन्याय को लेकर आवाज उठाती है, तो उसे सुना जाना चाहिए। उन्होंने ज्योति सिंह की बातों को ध्यान से सुना और भरोसा दिलाया कि जन सुराज मंच महिलाओं की गरिमा की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें ज्योति सिंह भावुक होकर अपने अनुभव साझा करती दिख रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी भी सियासी पार्टी का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं और उनका लक्ष्य केवल सत्य की लड़ाई लड़ना है।
जनता के बीच यह मुलाकात एक बड़ा संदेश लेकर आई है — कि एक महिला अगर ठान ले, तो वह सिस्टम के सामने भी खड़ी हो सकती है। पवन सिंह की लोकप्रियता के चलते यह मामला मीडिया में लगातार सुर्खियों में बना हुआ है, लेकिन ज्योति सिंह की सादगी और स्पष्टता ने उन्हें लोगों की सहानुभूति और समर्थन दिलाया है।
अंततः यह मुलाकात हमें याद दिलाती है कि राजनीति से परे भी एक इंसानी पक्ष होता है, जहां कोई महिला अपने स्वाभिमान, अधिकार और न्याय के लिए खड़ी होती है — न कि किसी पद या शक्ति की चाह में।