बिहार चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा बीजेपी सक्रिय, तीन लाख प्रवासी बिहारियों को मतदान हेतु भेजने की तैयारी
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी रणनीति को और तेज़ कर दिया है। इस बार पार्टी सिर्फ बिहार की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन राज्यों में भी सक्रिय हो गई है जहाँ बड़ी संख्या में बिहार के प्रवासी मजदूर और कर्मचारी रहते हैं। इसी कड़ी में हरियाणा बीजेपी ने भी मोर्चा संभाल लिया है और अब वह राज्य में रह रहे करीब तीन लाख से अधिक प्रवासी बिहारियों को मतदान के लिए बिहार भेजने की तैयारी में जुट गई है।
हरियाणा के 14 जिलों — जिनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, पानीपत, करनाल, हिसार और अंबाला प्रमुख हैं — में बड़ी संख्या में बिहार के लोग कामकाजी वर्ग के रूप में बसे हुए हैं। इनमें से अधिकांश लोग मूल रूप से बिहार के विभिन्न जिलों जैसे दरभंगा, समस्तीपुर, सिवान, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और गया से आते हैं। बीजेपी की योजना है कि इन सभी प्रवासी मतदाताओं को संगठित करके चुनावी प्रक्रिया में शामिल किया जाए, ताकि बिहार में पार्टी को अधिक से अधिक सीटों पर लाभ मिल सके।
जानकारी के अनुसार, हरियाणा बीजेपी के स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहले ही इन प्रवासी बिहारियों से संपर्क साधना शुरू कर चुके हैं। पार्टी स्तर पर बनाए गए विशेष प्रवासी समन्वय प्रकोष्ठ का काम है — मतदाताओं की सूची तैयार करना, उनके मूल निवास स्थान की जानकारी एकत्र करना और फिर उन्हें समूहों में संगठित करके बिहार भेजने की योजना बनाना। इस पूरे अभियान को लेकर हरियाणा बीजेपी में उत्साह देखा जा रहा है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह कदम न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संगठनात्मक मजबूती का भी उदाहरण है। भाजपा का मानना है कि जो बिहारी प्रवासी हरियाणा में रहकर पार्टी की नीतियों से लाभान्वित हुए हैं — जैसे आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, जन धन योजना और श्रमिक कल्याण योजनाएँ — वे स्वाभाविक रूप से पार्टी के पक्ष में मतदान करेंगे। इसीलिए उन्हें सक्रिय रूप से बिहार भेजने की योजना बनाई गई है ताकि वे अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।
इस पहल को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि हरियाणा में रह रहे प्रवासी बिहारी केवल वोटर नहीं, बल्कि पार्टी के समर्थक भी हैं। वे भाजपा की विचारधारा से जुड़ चुके हैं और बिहार के विकास में मोदी सरकार की भूमिका को समझते हैं। इसलिए यह अभियान न केवल मतदान सुनिश्चित करने का प्रयास है, बल्कि जनसंपर्क और जनजागरण का भी हिस्सा है।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह “राजनीतिक प्रबंधन” का एक नया रूप है। उनका आरोप है कि बीजेपी प्रवासी मजदूरों की भावनाओं का राजनीतिक लाभ उठा रही है। हालांकि, पार्टी नेताओं का कहना है कि यह कोई राजनीतिक चाल नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है — हर नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करना।
कुल मिलाकर, हरियाणा बीजेपी का यह अभियान बिहार चुनाव में एक दिलचस्प मोड़ ला सकता है। यदि तीन लाख से अधिक प्रवासी बिहारी सच में मतदान के लिए अपने गृह राज्य लौटते हैं, तो कई सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं। इस पहल से न केवल बीजेपी की रणनीतिक दूरदर्शिता झलकती है, बल्कि यह भी स्पष्ट होता है कि पार्टी जमीनी स्तर पर संगठन को किस तरह सक्रिय रख रही है।

