‘मुझे भी नचनिया कहते हैं’ – जींस और मीट विवाद पर तनाव में मैथिली ठाकुर, ट्रोल्स को देती हैं अनोखा जवाब!
लोकप्रिय गायिका मैथिली ठाकुर, जो अपनी सुरीली आवाज़ और भारतीय संस्कृति से जुड़े गीतों के लिए जानी जाती हैं, हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बार फिर चर्चा में आ गईं। कारण बना एक विवाद — जींस पहनने और मीट खाने को लेकर सोशल मीडिया पर उठी बहस। मैथिली, जो अक्सर पारंपरिक लिबास में देखी जाती हैं, जब कभी मॉडर्न ड्रेस जैसे जींस या वेस्टर्न आउटफिट में दिख जाती हैं, तो कुछ यूज़र्स उन्हें निशाने पर ले लेते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ।
मैथिली ठाकुर ने एक लाइव सेशन में बताया कि कैसे कुछ लोग उन्हें “संस्कारी” छवि में ही देखना चाहते हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “जब मैं सलवार या साड़ी पहनती हूं, तो कहते हैं ‘वाह, देवी जैसी लगती हो।’ लेकिन अगर जींस पहन लूं तो वही लोग कहते हैं – ‘अब तो ये भी बदल गई।’ मुझे भी नचनिया कहते हैं। कभी सोचती हूं कि आखिर लोगों को क्या चाहिए?”
यह बयान सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया। कुछ लोगों ने मैथिली का समर्थन किया, तो कुछ ने फिर से वही पुरानी आलोचना शुरू कर दी। मगर मैथिली ने इसे लेकर बेहद परिपक्व प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह अपनी संस्कृति से बहुत जुड़ी हुई हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह आधुनिक सोच नहीं रखतीं। उनके अनुसार, कपड़े या भोजन किसी की “संस्कृति” का पैमाना नहीं होते।
जींस विवाद के साथ-साथ मीट खाने पर भी उन्हें ट्रोल किया गया। कुछ लोगों ने पुराने वीडियोज़ के आधार पर उन्हें निशाने पर लेते हुए कहा कि “जो देवी-देवताओं के भजन गाती हैं, वो मीट कैसे खा सकती हैं?” इस पर मैथिली ने स्पष्ट किया कि वह शाकाहारी हैं, लेकिन किसी के खान-पान को लेकर निर्णय देना गलत है। उन्होंने कहा, “हर व्यक्ति की अपनी पसंद होती है। हमें दूसरों के भोजन या जीवनशैली पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।”
ट्रोलिंग से निपटने के अपने तरीके पर मैथिली ने बताया कि पहले उन्हें ऐसी बातें बहुत दुख पहुंचाती थीं। लेकिन अब उन्होंने ‘सकारात्मक नजरिया’ अपनाया है। उन्होंने कहा, “मैं अब कोशिश करती हूं कि नकारात्मक टिप्पणियों पर ध्यान न दूं। अगर कोई बुरा कह भी देता है, तो मैं सोचती हूं कि वो व्यक्ति शायद मुझे समझ नहीं पाया।”
मैथिली ठाकुर आज उन कुछ कलाकारों में से हैं जो सोशल मीडिया के दबाव के बावजूद अपनी सादगी और स्वाभाविकता बनाए रखे हुए हैं। उन्होंने साबित किया है कि एक कलाकार का असली मापदंड उसका कला के प्रति समर्पण, न कि उसके कपड़े या जीवनशैली है।
आखिर में मैथिली ने अपने प्रशंसकों से अपील की — “प्यार दीजिए, सम्मान दीजिए। आलोचना से कुछ नहीं बदलता, लेकिन समर्थन से बहुत कुछ अच्छा हो सकता है।”
उनका यह संदेश न केवल कलाकारों बल्कि आम लोगों के लिए भी प्रेरणादायक है — कि अपने असली स्वरूप में रहना ही सबसे बड़ी ताकत है, चाहे दुनिया कुछ भी कहे।

