दिल्ली से ब्रजभूमि तक ‘सनातन यात्रा’ पर निकले धीरेन्द्र शास्त्री जी, अखण्ड ध्वजा के पुण्य संकल्प को किया समर्पित
भारत की आध्यात्मिक भूमि पर एक बार फिर सनातन धर्म का जयघोष गूंज उठा है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने दिल्ली से ब्रजभूमि तक एक अद्भुत और प्रेरणादायक यात्रा — “सनातन यात्रा” का शुभारंभ किया है। इस यात्रा का उद्देश्य है भारत की प्राचीन संस्कृति, धर्म और अध्यात्म के गौरव को पुनः विश्व मंच पर स्थापित करना।
शास्त्री जी ने इस यात्रा को “अखण्ड सनातन ध्वजा” के पुण्य संकल्प को समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि यह ध्वजा केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा है — वह आत्मा जो हजारों वर्षों से अनगिनत आघातों के बाद भी अडिग और अखण्ड रही है। यात्रा के आरंभ पर उन्होंने भक्तों से आह्वान किया, “हम सबका यह कर्तव्य है कि सनातन की ध्वजा विश्व के हर कोने में फहरती रहे। यह केवल धर्म की नहीं, बल्कि संस्कृति और मानवता की विजय यात्रा है।”
दिल्ली से प्रारंभ होकर यह यात्रा मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव जैसे पवित्र तीर्थस्थलों से होती हुई ब्रजभूमि तक पहुंचेगी। मार्ग में हजारों श्रद्धालु शास्त्री जी का स्वागत कर रहे हैं। भजन, कीर्तन, सत्संग और प्रवचनों के माध्यम से यह यात्रा एक आध्यात्मिक उत्सव का रूप ले चुकी है।
धीरेन्द्र शास्त्री जी ने कहा कि आज जब समाज विभाजन और वैमनस्य के दौर से गुजर रहा है, तब सनातन धर्म का संदेश “वसुधैव कुटुम्बकम्” पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने कहा, “सनातन धर्म किसी एक जाति या समुदाय का धर्म नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग है। यह प्रेम, सेवा और करुणा की संस्कृति है।”
यात्रा के दौरान बागेश्वर धाम सरकार द्वारा अनेक सामाजिक और धार्मिक कार्य भी किए जा रहे हैं — जैसे गौसेवा, वृक्षारोपण, गरीबों को भोजन वितरण और वेद पाठ का आयोजन। शास्त्री जी का कहना है कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के उत्थान में भी उसकी भूमिका होनी चाहिए।
इस यात्रा में देशभर से साधु-संत, युवा और महिलाएँ बड़ी संख्या में भाग ले रही हैं। कई राज्यों के श्रद्धालु अपने-अपने क्षेत्रों से रथ लेकर इस यात्रा से जुड़ रहे हैं। यात्रा का हर पड़ाव एक उत्सव की तरह है — जहाँ भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
धीरेन्द्र शास्त्री जी ने यह भी कहा कि यह सनातन यात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि “राष्ट्र जागरण यात्रा” है। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे अपने धर्म और संस्कृति के प्रति गर्व महसूस करें और जीवन में धर्म, सेवा व सत्य के मार्ग पर चलें।
अंत में शास्त्री जी ने भावपूर्ण शब्दों में कहा — “यह यात्रा तब तक पूर्ण नहीं होगी जब तक हर भारतीय हृदय में सनातन की ज्योति प्रज्वलित न हो जाए। हमारी अखण्ड ध्वजा विश्व-आकाश में सदा लहराती रहे — यही हमारा संकल्प, यही हमारी साधना है।”
इस प्रकार “सनातन यात्रा” न केवल एक धार्मिक अभियान है, बल्कि यह भारत की आत्मा के पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुकी है।

