जन सुराज की हार: पीके ने कहा- सत्ता परिवर्तन भी नहीं करा सके, पर बिहार की राजनीति बदलने में निभाई भूमिका, ली हार की जिम्मेदारी।

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जन सुराज की करारी हार: पीके ने कहा- सत्ता परिवर्तन भी नहीं करा सके, पर बिहार की राजनीति बदलने में निभाई भूमिका, ली 100% जिम्मेदारी!

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर (पीके) की पार्टी जन सुराज का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। चुनाव से पहले बड़े-बड़े दावे करने वाली यह पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई और अधिकांश सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। करारी हार के बाद, मंगलवार को पीके ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में विनम्रता और दृढ़ संकल्प का मिश्रण पेश किया।

हार की 100% जिम्मेदारी

प्रशांत किशोर ने बिना किसी हिचकिचाहट के जन सुराज की हार की पूरी जिम्मेदारी ली। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अपनी असफलता को स्वीकार करते हैं।

पीके ने कहा, “हमने ईमानदार प्रयास किया है, लेकिन हमें इसमें बिल्कुल सफलता नहीं मिली। व्यवस्था परिवर्तन की बात छोड़िए, हम सत्ता परिवर्तन भी नहीं करा सके। इसकी पूरी ज़िम्मेदारी मेरी है। मैं यह ज़िम्मेदारी 100% अपने ऊपर लेता हूँ कि जनता का विश्वास नहीं जीत पाया।”

उन्होंने कहा कि जनता को अपनी बात सही से समझा नहीं पाना उनका दोष है। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी कोशिशों में, उनकी सोच में या जनता को समझाने में कहीं न कहीं कमी रह गई, जिसके कारण जनता ने जन सुराज को नहीं चुना।

राजनीति बदलने में भूमिका का दावा

भले ही जन सुराज चुनावी रेस में विफल रही, लेकिन प्रशांत किशोर ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने बिहार की राजनीति को बदलने में कुछ हद तक भूमिका निभाई है। पीके के अनुसार, उनके आंदोलन ने:

  • जातिवाद की राजनीति से अलग हटकर विकास और व्यवस्था परिवर्तन के मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाया।

  • जन सुराज ने जाति या धर्म का जहर फैलाने का गुनाह नहीं किया।

  • अपने अभियान के दौरान उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन जैसे बुनियादी मुद्दों पर लगातार दबाव बनाए रखा।

उन्होंने कहा, “बिहार की राजनीति बदलने में हमारी भूमिका ज़रूर बनी है।” यह बयान दर्शाता है कि पीके चुनावी परिणाम को अपने आंदोलन का अंत नहीं मानते, बल्कि इसे एक दीर्घकालिक ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की शुरुआत मानते हैं।

‘संन्यास’ पर दिया राजनीतिक जवाब

जब पत्रकारों ने उन्हें उनके पुराने बयानों (कि अगर जेडीयू 25 से ज्यादा सीटें जीत गई तो वह राजनीति छोड़ देंगे) की याद दिलाई, तो पीके ने अनुभवी नेता की तरह जवाब दिया।

उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, “मैं किस पद पर हूं जिससे इस्तीफा दूं? मैंने यह नहीं कहा था कि बिहार छोड़ दूंगा या जनता की बात कहना बंद कर दूंगा।”

उन्होंने NDA सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर नीतीश कुमार डेढ़ करोड़ महिलाओं को ₹2 लाख देने का अपना चुनावी वादा पूरा कर दें, तो वह राजनीति छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य सरकार पर वादे पूरे करने का दबाव बनाना होगा।

आगे की रणनीति: उपवास और संघर्ष

पीके ने स्पष्ट किया कि वह बिहार नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा, “कोई तब तक नहीं हारता, जब तक वह छोड़ता नहीं है।” अपनी हार के प्रायश्चित के तौर पर और आत्ममंथन के लिए उन्होंने 20 नवंबर को एक दिन का सामूहिक मौन उपवास रखने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अब सलाह का समय खत्म हो चुका है और संघर्ष का समय शुरू होगा।


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