प्रधानमंत्री कार्यालय का सख्त रुख: इंडिगो CEO पर उड़ानों को सामान्य करने का दबाव
सरकार के सूत्रों के मुताबिक, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो में परिचालन संकट (Operational Crisis) गहराने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एयरलाइन से जुड़े हालात पर विस्तृत ब्रीफिंग दी गई है। PMO ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है और उड़ानों की स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य करने के लिए सीधे इंडिगो के CEO, पीटर एल्बर्स, से संपर्क साधा है। PMO का यह कदम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार यात्रियों को हो रही भारी असुविधा को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
अभूतपूर्व संकट और यात्रियों की परेशानी
पिछले कई दिनों से इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें रद्द (Cancel) हो रही हैं या घंटों की देरी से चल रही हैं। इस अभूतपूर्व संकट ने देश भर के हवाई अड्डों पर हजारों यात्रियों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों में अचानक बदलाव और एयरलाइन के खराब रोस्टर प्रबंधन (Roster Management) को इस समस्या की मुख्य जड़ माना जा रहा है। इंडिगो की तरफ से एक दिन में 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द करने की खबर ने स्थिति की गंभीरता को उजागर किया, जिसके बाद सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा।
PMO का सीधा हस्तक्षेप और दबाव
मामले की राष्ट्रीय संवेदनशीलता को देखते हुए, नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने सीधे कमान संभालते हुए इंडिगो प्रबंधन पर दबाव बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, PMO ने CEO पीटर एल्बर्स से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि एयरलाइन को अपनी परिचालन प्रणाली तुरंत ठीक करनी होगी और यात्रियों की समस्याओं का समाधान करना होगा। इस दबाव के चलते ही इंडिगो के CEO को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी और उन्होंने 10 से 15 दिसंबर के बीच स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई।
सरकार का यह सख्त रुख दो प्रमुख बातों को दर्शाता है:
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यात्री हित सर्वोपरि: सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश की सबसे बड़ी एयरलाइन, जिसका घरेलू बाजार में 60% से अधिक हिस्सा है, अपनी विफलता का खामियाजा आम जनता को न भुगताए।
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एकाधिकार पर सवाल: विपक्षी नेताओं और विमानन विशेषज्ञों ने इंडिगो के इस संकट के लिए सरकार के कथित ‘एकाधिकार मॉडल’ को जिम्मेदार ठहराया है। PMO का सक्रिय होना इस धारणा को भी दूर करने का प्रयास है।
DGCA के नियमों में अस्थाई राहत और संभावित जुर्माना
यात्रियों की परेशानी को कम करने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी, जिसके तहत FDTL के कुछ नियमों को अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया गया, ताकि एयरलाइन को कुछ राहत मिल सके। हालांकि, सरकार एयरलाइन की लापरवाही पर भारी जुर्माना (Penalty) लगाने और यहां तक कि CEO के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई करने की भी तैयारी में है।
एयरलाइन संकट से निपटने के लिए सरकार ने दूरी के हिसाब से अधिकतम हवाई किराया भी तय कर दिया है, ताकि टिकटों के दामों में हो रही असामान्य बढ़ोतरी को रोका जा सके।
PMO का यह सीधा हस्तक्षेप यह स्पष्ट करता है कि सरकार विमानन सुरक्षा (Aviation Safety) और यात्री सुविधा से जुड़े किसी भी मुद्दे को हल्के में नहीं लेगी और देश के विमानन क्षेत्र में पूर्ण स्थिरता बहाल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।

