महाराष्ट्र में योगी आदित्यनाथ के ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ वाले बयान पर अब एनडीए के ही साथी अजित पवार ने सवाल उठाए हैं। उनका यह बयान उस समय आया है, जब महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की गठबंधन सरकार के बीच राजनीतिक गतिरोध और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है। योगी आदित्यनाथ का यह बयान विशेष रूप से राज्य के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने गठबंधन के भीतर बंटवारे को लेकर चेतावनी दी थी।
अजित पवार ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि, “हम महायुति (एनडीए) में एक साथ काम कर रहे हैं, लेकिन हमारी पार्टियों की विचारधारा अलग-अलग है।” उनका यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि हालांकि गठबंधन में भागीदार एक-दूसरे के सहयोगी हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण में बुनियादी अंतर है। पवार ने यह भी कहा कि भाजपा और उनकी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के बीच विचारधाराओं का अंतर स्पष्ट है, और इसी अंतर के कारण, गठबंधन में कभी न कभी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
यह बयान तब आया जब योगी आदित्यनाथ ने एक सार्वजनिक मंच से ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ जैसा विवादास्पद बयान दिया था, जिसे कुछ राजनीतिक विशेषज्ञ भाजपा के आंतरिक एकता के प्रयासों के रूप में देख रहे थे, वहीं विपक्ष इसे सत्ता के केंद्रीकरण के संकेत के रूप में ले रहा है। आदित्यनाथ का यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा के बढ़ते प्रभाव और शिवसेना की विभाजन की स्थिति को लेकर था, और इसने राज्य में राजनीतिक हलचल मचा दी थी।
अजित पवार का यह बयान यह भी दर्शाता है कि एनडीए में शामिल दलों के बीच असहमति और वैचारिक भिन्नताएं अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगी हैं। पवार ने इस सवाल को उठाया कि जब एक साथ काम करने वाली पार्टियों की विचारधारा में इतना अंतर हो, तो क्या यह गठबंधन दीर्घकालिक रूप से स्थिर रह पाएगा?
इससे पहले, पवार और उनकी पार्टी के अन्य नेता भी बार-बार यह कह चुके हैं कि वे अपनी पार्टी के सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे, चाहे गठबंधन में रहकर सत्ता के लाभ क्यों न मिलें। ऐसे में, योगी आदित्यनाथ का ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ वाला बयान इस सवाल को और ज्यादा गहरा कर देता है कि क्या आने वाले समय में एनडीए के भीतर गहरे मतभेद उभरकर सामने आ सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जब तक विचारधाराओं और दृष्टिकोणों में बुनियादी अंतर रहेंगे, तब तक किसी भी गठबंधन में स्थिरता बनाए रखना मुश्किल होगा। हालांकि, पवार ने यह भी साफ किया कि वे गठबंधन में बने रहेंगे, लेकिन उनकी पार्टी अपनी विचारधारा से पीछे नहीं हटेगी।
अजित पवार के इस बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि महाराष्ट्र में सत्ता के संघर्ष और गठबंधन के भीतर की राजनीति आने वाले समय में और अधिक जटिल हो सकती है।

