महाकुंभ में छाए झज्जर के IITian बाबा अभय सिंह, बेटे को याद कर भावुक हुए वकील पिता

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महाकुंभ में छाए झज्जर के IITian बाबा अभय सिंह, बेटे को याद कर भावुक हुए वकील पिता

प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ, जहां लाखों श्रद्धालु आस्था और आध्यात्मिकता की खोज में आते हैं, इस बार एक अनोखी शख्सियत के कारण चर्चा का विषय बना। हरियाणा के झज्जर जिले से ताल्लुक रखने वाले अभय सिंह, जो कभी इंजीनियर बनने का सपना लेकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मुंबई पहुंचे थे, अब “IITian बाबा” के नाम से पहचाने जा रहे हैं। उनकी अनोखी यात्रा और आध्यात्मिक परिवर्तन ने लोगों का ध्यान खींचा है।

झज्जर के सासरौली गांव से IIT तक का सफर

अभय सिंह का पैतृक गांव हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित सासरौली है। बचपन से ही शिक्षा के क्षेत्र में अव्वल रहे अभय सिंह ने अपनी मेहनत और लगन से IIT मुंबई में दाखिला लिया। उन्होंने अपने माता-पिता और परिवार का नाम रोशन किया, और हर किसी को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं।

उनके पिता, जो पेशे से वकील हैं और झज्जर बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान भी रह चुके हैं, ने हमेशा अपने बेटे की उपलब्धियों पर गर्व किया। उन्होंने बताया कि अभय बचपन से ही जिज्ञासु और प्रतिभाशाली थे। उनकी सोच और दृष्टिकोण में एक अलग चमक थी, जो उन्हें अन्य बच्चों से अलग बनाती थी।

आध्यात्मिक यात्रा की ओर परिवर्तन

IIT मुंबई से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, अभय सिंह ने वह रास्ता चुना जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने तकनीकी दुनिया को पीछे छोड़कर अध्यात्म का मार्ग अपनाया। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य जीवन के गहरे अर्थ को खोजना और आत्मज्ञान प्राप्त करना था।

अभय सिंह ने कई वर्षों तक कठोर साधना और अध्ययन किया, और आज वे “IITian बाबा” के रूप में जाने जाते हैं। महाकुंभ के दौरान उनकी सादगी, ज्ञान और आध्यात्मिक दृष्टिकोण ने लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। सोशल मीडिया पर भी उनकी चर्चा जोरों पर है। लोग उनकी कहानी को प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे एक IITian ने अपने जीवन का इतना बड़ा निर्णय लिया।

पिता की भावनाएं

महाकुंभ में बेटे की इस नई पहचान और लोकप्रियता को देखकर अभय सिंह के पिता भावुक हो गए। उन्होंने कहा, “अभय ने जो रास्ता चुना है, वह हमारे परिवार के लिए अप्रत्याशित था, लेकिन मैं उसकी इच्छाओं और निर्णयों का सम्मान करता हूं। बचपन से ही उसमें कुछ अलग करने का जुनून था। आज वह लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।”

पिता ने आगे बताया कि भले ही अभय का यह निर्णय शुरू में परिवार के लिए कठिन था, लेकिन अब वे गर्व महसूस करते हैं कि उनका बेटा लोगों को आध्यात्मिकता और सकारात्मकता की ओर प्रेरित कर रहा है।

प्रेरणा और संदेश

IITian बाबा अभय सिंह की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनकी यात्रा यह साबित करती है कि ज्ञान केवल पुस्तकों या डिग्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मा की गहराई और अनुभवों में भी बसता है।

महाकुंभ में उनकी उपस्थिति न केवल एक अनोखी कहानी है, बल्कि यह आध्यात्मिकता और आधुनिकता के संगम का भी प्रतीक है। उनका जीवन यह सिखाता है कि चाहे आप किसी भी क्षेत्र में हों, सच्ची शांति और खुशी हमेशा भीतर की यात्रा से ही प्राप्त होती है।


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