लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के प्रमुख पशुपति पारस ने हाल ही में एक सार्वजनिक सभा में अपने भतीजे और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान पर गंभीर आरोप लगाए। पशुपति पारस ने कहा कि चिराग पासवान के कारण उन्हें अपने भाई, स्वर्गीय रामविलास पासवान से अंतिम समय में नहीं मिल पाने का दुख है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी का बहाना बनाकर उन्हें और उनके परिवार के किसी सदस्य को रामविलास पासवान से मिलने नहीं दिया गया, जबकि अंतिम समय में रामविलास पासवान ने परिवार के सभी सदस्य को ढूंढने की कोशिश की थी।
पशुपति पारस ने यह आरोप खगड़िया जिले में एक सभा को संबोधित करते हुए लगाया। उन्होंने कहा, “इस चां@$& के कारण बड़े भाई रामविलास पासवान के अंतिम समय में मैं उनसे नहीं मिल पाया। कोरोना के नाम पर हमें मिलने से रोक दिया गया, जबकि बड़े भाई सभी परिवार के लोगों को ढूंढ रहे थे।” इस बयान ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई, बल्कि पारिवारिक रिश्तों को भी सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया है।
स्वर्गीय रामविलास पासवान, जो LJP के संस्थापक थे, का निधन 8 अक्टूबर 2020 को हुआ था। उनके निधन के बाद से ही उनके परिवार में कई मतभेद सामने आने लगे थे। खासकर चिराग पासवान और पशुपति पारस के बीच तल्खी बढ़ती चली गई। जहां चिराग पासवान ने अपने पिता के बाद पार्टी की कमान संभालने की कोशिश की, वहीं पशुपति पारस ने अपने कद को बढ़ाने के लिए पार्टी में अपनी स्थिति मजबूत की। इसके चलते LJP के भीतर नेतृत्व को लेकर असहमति और तनाव बढ़ गया।
पशुपति पारस ने आगे कहा कि रामविलास पासवान का अंतिम समय बहुत कठिन था और उन्होंने अपने परिवार के सभी सदस्यों से मिलकर विदाई लेना चाहा था, लेकिन चिराग पासवान ने उन्हें यह अवसर नहीं दिया। पारस का कहना था कि चिराग के इस व्यवहार से न केवल परिवार के रिश्तों में कड़वाहट आई, बल्कि यह एक असंवेदनशीलता की मिसाल बन गई।
चिराग पासवान ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह हमेशा अपने पिता के अंतिम समय में उनके पास थे और उन्हें अपने परिवार के साथ समय बिताने का पूरा अधिकार था। उन्होंने यह भी कहा कि पारिवारिक मामलों को सार्वजनिक करना उचित नहीं है और वे इसे परिवार के अंदर ही सुलझाने की कोशिश करेंगे।
हालांकि, पशुपति पारस के आरोपों से यह साफ जाहिर होता है कि LJP के अंदर की राजनीति में एक गहरी खाई बन चुकी है। परिवार के भीतर तनाव के साथ-साथ पार्टी की राजनीति भी प्रभावित हो रही है। दोनों नेताओं के बीच यह विवाद पार्टी के भविष्य पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि LJP के पास बिहार में एक मजबूत राजनीतिक आधार है और ऐसे विवाद पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं परिवार के रिश्तों से ऊपर हो जाती हैं? या फिर क्या राजनीति परिवार के अंदर की समस्याओं को सुलझाने का एक साधन बन सकती है? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ही मिलेंगे।