अयोध्या राम मंदिर के 191 फीट शिखर पर 25 नवंबर को PM मोदी करेंगे ध्वजारोहण, आज से भव्य पूजन शुरू।

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अयोध्या में रामराज्य का शंखनाद: 191 फीट ऊँचे शिखर पर 25 नवंबर को PM मोदी करेंगे ध्वजारोहण, भव्य अनुष्ठान प्रारंभ

अयोध्या में नवनिर्मित श्री राम मंदिर का उद्घाटन और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह अब अपने अंतिम और सबसे भव्य चरण में प्रवेश कर चुका है। मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के लिए आज से विधिवत पूजन अनुष्ठान शुरू हो जाएगा। यह आयोजन ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि 25 नवंबर को स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के 191 फीट ऊँचे शिखर पर पताका फहराएंगे, जो मंदिर के पूर्ण निर्माण और हिंदू आस्था के पुनरुत्थान का प्रतीक होगा।

कलश यात्रा से अनुष्ठान की शुरुआत

ध्वजारोहण पूजन की पूर्व संध्या पर, एक भव्य और मनोहारी कलश यात्रा निकाली गई, जिसने पूरे अयोध्या को भक्तिमय रंगों में रंग दिया। यह यात्रा इस अनुष्ठान का औपचारिक शुभारंभ थी, जिसमें 551 महिलाओं ने भाग लिया। ये महिलाएं सरयू नदी से पवित्र जल लेकर पूरे भक्तिभाव से यात्रा में शामिल हुईं। सरयू का पवित्र जल न केवल कलश पूजन के लिए उपयोग होगा, बल्कि यह इस महान अनुष्ठान में शुद्धि और पवित्रता का भाव भी लेकर आया है। इस कलश यात्रा ने ही आज से शुरू होने वाले बहु-दिवसीय पूजन की नींव रख दी है।

191 फीट शिखर पर पीएम मोदी का ऐतिहासिक ध्वजारोहण

इस पूरे अनुष्ठान का केंद्र बिंदु वह पल होगा, जब 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 191 फीट ऊँचे शिखर पर ध्वजारोहण करेंगे। यह ध्वज केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि रामभक्तों के सदियों के संघर्ष, धैर्य और आस्था की जीत का प्रतीक होगा।

  • राजनीतिक एवं सांस्कृतिक महत्व: प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण करना इस बात का प्रतीक है कि राम मंदिर निर्माण को राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के रूप में देखा जा रहा है।

  • वास्तुकला की भव्यता: 191 फीट की ऊँचाई मंदिर की विशालता और नागर शैली की वास्तुकला की भव्यता को दर्शाती है, जिसे हजारों कारीगरों ने वर्षों की मेहनत से साकार किया है।

यह ध्वजारोहण समारोह केवल मंदिर की भौतिक पूर्णता का संकेत नहीं देगा, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से ‘रामराज्य’ की स्थापना के एक नए युग का शंखनाद भी करेगा, जिसकी परिकल्पना देश की संस्कृति में की गई है।

आज से शुरू होगा भव्य पूजन

आज से शुरू हो रहे पूजन कार्यक्रम में देश भर के जाने-माने आचार्य और संत भाग लेंगे। यह पूजन शिखर और ध्वजदंड की पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा। इन अनुष्ठानों में वेदों के मंत्रोच्चार, विशेष हवन और देवताओं का आह्वान शामिल है।

पूरे देश की निगाहें अब अयोध्या पर टिकी हैं। मंदिर के निर्माण कार्य की पूर्णता और शिखर पर ध्वज फहराने की तैयारी को देखते हुए, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। यह आयोजन करोड़ों हिंदुओं की आस्था का महापर्व बन गया है, जो न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर के रामभक्तों के लिए एक अविस्मरणीय क्षण होगा।

यह ध्वजारोहण राम मंदिर के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगा, जब सदियों के इंतजार के बाद भगवान राम की पताका उनके भव्य महल के शिखर पर शान से लहराएगी।


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