उज्जैन प्रशासन ने शंकराचार्य मठ सहित अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर सिंहस्थ कुंभ हेतु कार्रवाई की

Spread the love

उज्जैन में शंकराचार्य मठ पर प्रशासनिक कार्रवाई

उज्जैन में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए शंकराचार्य मठ परिसर में बने चार मंजिला भवन को ध्वस्त कर दिया। यह भवन लगभग 10 से 15 हजार वर्गफुट क्षेत्र में फैला हुआ था और प्रशासन के अनुसार नियमों के विरुद्ध निर्मित किया गया था। इस इमारत में 40 से अधिक एसी और नॉन-एसी कमरे मौजूद थे, जिनका उपयोग कथित तौर पर व्यावसायिक ‘यात्रीगृह’ या होटल के रूप में किया जा रहा था।

कार्रवाई का कारण

नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि इस निर्माण को लेकर पहले ही नोटिस जारी किए गए थे। अपर आयुक्त संतोष टैगोर ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर यह कठोर कदम उठाना पड़ा। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई उज्जैन को आगामी सिंहस्थ कुंभ के लिए अतिक्रमण मुक्त बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। इसी अभियान के तहत कुल 127 अवैध निर्माणों की सूची तैयार की गई है।

अन्य ढांचों पर भी बुलडोजर

शंकराचार्य मठ के अलावा प्रशासन ने माधवानंद आश्रम, इंद्रदेव महाराज आश्रम, और कलोता समाज धर्मशाला जैसे अन्य अवैध निर्माणों को भी जमींदोज किया। प्रशासन का कहना है कि धार्मिक संस्थानों के नाम पर व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित करना नियमों के खिलाफ है और इससे शहर की व्यवस्था प्रभावित होती है।

सिंहस्थ कुंभ की तैयारी

उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ का आयोजन हर 12 वर्षों में होता है और यह विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है। लाखों श्रद्धालु और पर्यटक इस मेले में शामिल होते हैं। प्रशासन का मानना है कि यदि अवैध निर्माणों को समय रहते नहीं हटाया गया तो यातायात, सुरक्षा और व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। इसी कारण नगर निगम ने सख्त कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज कर दिया है।

स्थानीय प्रतिक्रिया

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने प्रशासन के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों को व्यावसायिक केंद्र में बदलना अनुचित है। वहीं, कुछ लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध भी जताया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई केवल अवैध निर्माणों तक सीमित है और धार्मिक गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

निष्कर्ष

उज्जैन प्रशासन की यह कार्रवाई शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने और सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों को सुचारु करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शंकराचार्य मठ सहित अन्य आश्रमों और धर्मशालाओं पर हुई कार्रवाई यह संदेश देती है कि नियमों के विरुद्ध निर्माण चाहे धार्मिक संस्थानों से जुड़ा हो या निजी, उसे बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में प्रशासन द्वारा सूचीबद्ध अन्य अवैध निर्माणों पर भी इसी तरह की कार्रवाई की संभावना है।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *