बनारस में होली की धूम, मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली में उमड़ी हजारों की भीड़।

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बनारस में होली की धूम: मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली में उमड़ी हजारों की भीड़

वाराणसी। बनारस होली के रंग में रंगने लगा है। शहर के घाटों पर उत्सव का माहौल है और आज मणिकर्णिका घाट पर आयोजित मसाने की होली में हजारों की भीड़ उमड़ी। यह अनोखी परंपरा बनारस की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है, जहां लोग श्मशान घाट पर भी होली खेलते हैं और जीवन-मृत्यु के अद्वितीय दर्शन को उत्सव के रूप में मनाते हैं।

मसाने की होली का महत्व मणिकर्णिका घाट को हिंदू धर्म में मोक्षदायी स्थल माना जाता है। यहां सदियों से यह परंपरा चली आ रही है कि होली के अवसर पर लोग श्मशान में भी रंग-गुलाल खेलते हैं। इसे “मसाने की होली” कहा जाता है। इस आयोजन का संदेश है कि मृत्यु भी जीवन का हिस्सा है और उत्सव हर परिस्थिति में मनाया जा सकता है।

भीड़ और माहौल आज सुबह से ही घाट पर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। दोपहर तक हजारों लोग वहां पहुंच चुके थे। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भजन-कीर्तन और फाग गीतों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। लोग गुलाल उड़ाते हुए नाच-गान कर रहे थे। कई साधु-संत भी इस आयोजन में शामिल हुए और उन्होंने इसे जीवन के उत्सव का प्रतीक बताया।

स्थानीय प्रतिक्रिया स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मसाने की होली बनारस की अनोखी परंपरा है, जो शहर की आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है। एक श्रद्धालु ने कहा, “यहां होली खेलना हमें यह याद दिलाता है कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है।”

पर्यटन और आकर्षण इस आयोजन को देखने के लिए देश-विदेश से भी पर्यटक पहुंचे। विदेशी पर्यटकों ने कहा कि उन्होंने ऐसी परंपरा पहले कभी नहीं देखी। उनके लिए यह अनुभव अद्वितीय और अविस्मरणीय रहा। बनारस की यह परंपरा हर साल हजारों पर्यटकों को आकर्षित करती है और शहर की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करती है।

सुरक्षा और व्यवस्था भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष सुरक्षा इंतजाम किए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने घाट पर निगरानी रखी ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। आयोजन शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।

निष्कर्ष बनारस की मसाने की होली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के दर्शन का अद्वितीय संगम है। मणिकर्णिका घाट पर उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि बनारस की परंपराएं आज भी उतनी ही जीवंत हैं जितनी सदियों पहले थीं। यह आयोजन न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि देश-विदेश से आए पर्यटकों के लिए भी एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।


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