गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर शौर्य का पूर्वाभ्यास, बारिश भी न डिगा सकी जवानों का हौसला
दिल्ली की कड़कड़ाती ठंड और अचानक हुई हल्की बूंदाबांदी के बीच आज कर्तव्य पथ एक जीवंत ऐतिहासिक कैनवास बन गया। अवसर था 77वें गणतंत्र दिवस की फुल ड्रेस रिहर्सल का, जहाँ भारतीय सेना के अनुशासन, आधुनिक शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का ऐसा संगम दिखा जिसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
‘वंदे मातरम्’ की गूँज और रिहर्सल का आगाज़
सुबह ठीक 10:30 बजे जैसे ही विजय चौक से परेड शुरू हुई, पूरा वातावरण ‘वंदे मातरम्’ के नारों से गुंजायमान हो उठा। इस साल का गणतंत्र दिवस विशेष रूप से ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। रिहर्सल के दौरान सेना के बैंडों ने जब इस अमर गीत की धुन बजाई, तो वहां मौजूद हजारों दर्शकों की आँखें नम और मन गौरव से भर गया। बारिश की बूंदों ने इस दृश्य को और भी गौरवमयी बना दिया, क्योंकि जवानों के कदम बिना डगमगाए पूरी लय के साथ आगे बढ़ते रहे।
नारी शक्ति और स्वदेशी तकनीक का दम
इस बार की रिहर्सल में ‘नारी शक्ति’ का एक नया और सशक्त रूप देखने को मिला। पहली बार वायुसेना के ब्रास बैंड का नेतृत्व महिला अग्निवीरों के एक दल ने किया, जो भारतीय सेना के बदलते और समावेशी स्वरूप का प्रतीक है।
सैन्य शक्ति के प्रदर्शन में भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ स्पष्ट दिखाई दी। रिहर्सल के दौरान स्वदेशी रूप से विकसित ‘प्रचंड’ लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, अर्जुन टैंक और ‘आकाश’ मिसाइल सिस्टम ने कर्तव्य पथ की जमीन को थरा दिया। दर्शकों के लिए सबसे रोमांचक पल वह था जब स्वदेशी ड्रोन स्वार्म (Drone Swarm) ने आसमान में विभिन्न आकृतियाँ बनाकर भारत की तकनीकी उन्नति का परिचय दिया।
झांकियों में दिखा ‘विकसित भारत’ का संकल्प
रिहर्सल के दौरान देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 30 भव्य झांकियों ने अपनी कला और संस्कृति का प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश की झांकी में ‘राम मंदिर’ और ‘डिजिटल यूपी’ का मेल दिखा, तो वहीं दक्षिण भारतीय राज्यों की झांकियों में प्राचीन परंपराओं और आधुनिक विकास का संतुलन नजर आया। इन झांकियों ने कर्तव्य पथ को एक ‘लघु भारत’ में तब्दील कर दिया, जहाँ उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक की विविधता एक सूत्र में पिरोई हुई दिखी।
जन-भागीदारी और कूटनीतिक झलक
रिहर्सल में इस बार 10,000 विशिष्ट नागरिकों के लिए विशेष दीर्घाएँ बनाई गई थीं। इनमें वे ‘धरतीपुत्र’ (किसान) और ‘श्रमजीवी’ शामिल थे, जिन्होंने इस भव्य आयोजन की तैयारियों में दिन-रात एक किया। वहीं, सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच विदेशी मेहमानों (यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों) के बैठने की व्यवस्था का भी पूर्वाभ्यास किया गया, जो भारत की बढ़ती कूटनीतिक पहुँच को दर्शाता है।
निष्कर्ष: 26 जनवरी का बेसब्री से इंतजार
आज की फुल ड्रेस रिहर्सल ने यह साफ कर दिया है कि 26 जनवरी 2026 का मुख्य समारोह न केवल भव्य होगा, बल्कि यह दुनिया को भारत के शौर्य, संस्कार और संकल्प का नया संदेश देगा। खराब मौसम के बावजूद जवानों की वह चमकती वर्दी, घोड़ों की टाप और आसमान में गरजते विमानों ने यह साबित कर दिया कि भारत का गणतंत्र अमर है और इसकी सुरक्षा करने वाले हाथ अटूट हैं।

