ट्रंप का टैरिफ धमाका: चीन के मुद्दे पर कनाडा को ‘आर या पार’ का अल्टीमेटम
दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से दो—अमेरिका और कनाडा—के बीच संबंधों में एक बार फिर कड़वाहट के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में कनाडा को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसने चीन के सामान के लिए ‘पिछले दरवाजे’ (ट्रांजिट पॉइंट) के रूप में काम करना बंद नहीं किया, तो अमेरिका सभी कनाडाई उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा देगा।
चेतावनी के पीछे का कारण: ‘बैकडोर एंट्री’ पर प्रहार
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि चीन अपने उत्पादों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), स्टील और एल्यूमीनियम को अमेरिकी बाजार में डंप करने के लिए कनाडा की सीमाओं का उपयोग कर रहा है। ट्रंप का आरोप है कि चीन के साथ कनाडा के ढीले व्यापारिक समझौते अमेरिकी अर्थव्यवस्था और स्थानीय उद्योगों के लिए खतरा बन रहे हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ऐसी किसी भी “व्यापारिक चालाकी” को बर्दाश्त नहीं करेगा जहाँ चीन का सामान ‘मेड इन कनाडा’ के लेबल के साथ या कनाडा के रास्ते बिना किसी भारी शुल्क के अमेरिका में प्रवेश करे।
100% टैरिफ: कनाडा के लिए अस्तित्व का संकट
कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिका केवल एक पड़ोसी नहीं, बल्कि उसकी जीवनरेखा है। कनाडा के कुल निर्यात का लगभग 75% हिस्सा अमेरिका जाता है। यदि ट्रंप अपनी चेतावनी को हकीकत में बदलते हैं और 100% टैरिफ लागू करते हैं, तो कनाडाई उत्पाद अमेरिकी बाजार में दोगुने महंगे हो जाएंगे। इसका सीधा असर कनाडा के ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों पर पड़ेगा। यह न केवल कनाडा की जीडीपी को प्रभावित करेगा, बल्कि वहां बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का कारण भी बन सकता है।
चीन के खिलाफ ट्रंप की घेराबंदी
यह अल्टीमेटम ट्रंप की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चीन की वैश्विक व्यापारिक पकड़ को कमजोर करना है। ट्रंप ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत सप्लाई चेन को पूरी तरह से सुरक्षित करना चाहते हैं। उनका संदेश स्पष्ट है: “आप या तो हमारे साथ व्यापार कर सकते हैं, या हमारे दुश्मनों की मदद कर सकते हैं।” यह चेतावनी उन देशों के लिए भी एक सबक है जो चीन और अमेरिका दोनों के साथ संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कनाडाई सरकार की दुविधा
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है। एक ओर उन पर चीन के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखने का दबाव है, तो दूसरी ओर अमेरिका जैसे विशाल बाजार को खोने का डर। ट्रंप की इस धमकी के बाद अब ओटावा में इस बात पर गहन मंथन शुरू हो गया है कि क्या चीन के खिलाफ अपने आयात नियमों को और सख्त किया जाए ताकि वाशिंगटन को खुश रखा जा सके।
निष्कर्ष: क्या यह नए ‘ट्रेड वॉर’ की शुरुआत है?
ट्रंप की इस चेतावनी ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। यदि बातचीत के जरिए इस मुद्दे का हल नहीं निकला, तो यह उत्तर अमेरिका में एक बड़े व्यापार युद्ध की शुरुआत हो सकती है। विशेषज्ञ इसे ट्रंप की ‘सौदेबाजी की कला’ (Art of the Deal) का हिस्सा भी मान रहे हैं, जहाँ वे दबाव बनाकर अपने मनमाफिक समझौते करवाना चाहते हैं। फिलहाल, गेंद कनाडा के पाले में है—उसे चुनना होगा कि वह चीन के लिए ‘ट्रांजिट पॉइंट’ बना रहेगा या अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक भविष्य को सुरक्षित करेगा।

