रावण दहन, जो कि दशहरा का प्रमुख आकर्षण है, भारत के विभिन्न हिस्सों में धूमधाम से मनाया गया। इस वर्ष, दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों में यह पर्व विशेष उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। रावण दहन के दौरान, जहां एक ओर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक विविधता और भव्यता का प्रदर्शन भी हुआ।
दिल्ली में, ऐतिहासिक रामलीला मैदान में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां रावण के विशाल पुतले का दहन देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग एकत्रित हुए। इस कार्यक्रम में रामलीला के मंचन के साथ ही, विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। जैसे ही रावण का पुतला आग के हवाले किया गया, वातावरण में जोश और उत्साह का माहौल बन गया। दिल्ली के लोगों ने इस अवसर पर रंग-बिरंगी आतिशबाजी का भी आनंद लिया, जिसने इस पर्व को और भी खास बना दिया।
मुंबई में भी रावण दहन की तैयारियां धूमधाम से की गईं। यहां, दादर के शिवाजी पार्क में आयोजित कार्यक्रम में बडे़ पैमाने पर रावण का दहन किया गया। इस अवसर पर फिल्मी सितारों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी glamorized किया। मुंबईकरों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया और रावण दहन के समय अपने मोबाइल में इस पल को कैद किया। मुम्बई में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी हुआ, जिसमें नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
चंडीगढ़ में, रावण दहन का आयोजन स्थानीय पार्कों और सामुदायिक स्थलों पर हुआ। यहां, स्थानीय निवासियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में रावण के पुतले तैयार किए और सामूहिक रूप से उन्हें जलाया। चंडीगढ़ के लोगों ने इस पर्व को मनाने के लिए सामूहिक भोज का भी आयोजन किया, जिससे आपसी बंधुत्व और मेलजोल का एहसास हुआ। स्थानीय कलाकारों ने भी अपने कौशल का प्रदर्शन किया, जिससे यह आयोजन और भी रंगीन हो गया।
वाराणसी में, गंगा किनारे स्थित घाटों पर रावण दहन का आयोजन किया गया। यहां के निवासियों ने परंपरागत रूप से गंगा पूजा के बाद रावण का दहन किया। वाराणसी की संकीर्तन और भजन की धुनों ने इस पर्व को आध्यात्मिक रूप से संजीवनी प्रदान की। रावण दहन के समय, घाटों पर लोगों की भीड़ थी, जो इस ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनना चाहती थी।
इन सभी शहरों में रावण दहन के अवसर पर सांस्कृतिक विविधता और एकता का अद्भुत मिश्रण देखने को मिला। जहां एक ओर लोग रावण के पुतले को जलाकर बुराई को समाप्त करने का संदेश दे रहे थे, वहीं दूसरी ओर उन्होंने एक-दूसरे के साथ मिलकर इस पर्व को मनाने में भी एकजुटता दिखाई।
हर स्थान पर रावण दहन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जहां लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। इस प्रकार, भारत के विभिन्न शहरों में रावण दहन ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि यह केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव भी है, जो हमें एकजुटता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। इस पर्व ने हमें याद दिलाया कि अच्छाई की हमेशा जीत होती है, और हमें इस सिद्धांत को अपने जीवन में उतारना चाहिए।

