लाल किले के माधव दास पार्क में इस वर्ष का दशहरा कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भव्य उत्सव में भाग लिया। श्री धार्मिक लीला समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल भारतीय संस्कृति की महत्ता को दर्शाया, बल्कि देश की एकता और अखंडता का संदेश भी दिया।
दशहरा, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस अवसर पर, रावण दहन का आयोजन किया गया, जो एक पारंपरिक विधि है। रावण, जो कि दुष्टता का प्रतीक है, का दहन करके लोग अच्छाई की जीत का उत्सव मनाते हैं। इस वर्ष, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने इस समारोह में शामिल होकर इसे और भी विशेष बना दिया।
इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे, जिन्होंने इस भव्य दृश्य का आनंद लिया। जैसे ही रावण के पुतले को आग के हवाले किया गया, दर्शकों में जोश और उल्लास का माहौल छा गया। आग की लपटें और आतिशबाजी ने पूरे वातावरण को और भी रंगीन बना दिया। लोग अपने मोबाइल फोन में इस पल को कैद करने के लिए उत्सुक थे, और कई ने वीडियो भी बनाए, जिन्हें सोशल मीडिया पर साझा किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि दशहरा हमें याद दिलाता है कि हमें हमेशा अच्छाई की रक्षा करनी चाहिए और बुराई का सामना करना चाहिए। उन्होंने भारतीय संस्कृति की गहराई और विविधता की भी सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संबोधन में इस पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला और लोगों को एकजुट रहने की प्रेरणा दी।
इस कार्यक्रम का एक खास पहलू यह था कि यह केवल धार्मिक उत्सव नहीं था, बल्कि एक सांस्कृतिक समागम भी था। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें लोक नृत्य, गीत, और नाटक शामिल थे। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया और इस पारंपरिक पर्व के महत्व को और बढ़ा दिया।
इस बार के दशहरा कार्यक्रम में विशेष ध्यान सुरक्षा पर भी दिया गया था। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। इसके साथ ही, स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी फैलाने का प्रयास किया गया, जिससे लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके।
इस भव्य उत्सव का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे देख रहे हैं और इस पर्व की सुंदरता को सराह रहे हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को एक विशेष महत्व प्रदान किया है, और यह हर किसी के लिए यादगार बन गया है।
दशहरा के इस पर्व ने एक बार फिर से यह साबित किया कि भारतीय संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं, और यह कि हम सबको मिलकर अपने समाज और संस्कृति को सशक्त बनाना है। इस दिन ने हमें एकता, प्रेम, और भाईचारे का संदेश दिया, जिसे हमें हमेशा याद रखना चाहिए।